Nepal Flash Floodनेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. नेपाल से आने वाले नदी के पानी को देखते हुए बिहार सरकार ने कई जिलों में अलर्ट जारी किया है. उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है.
नेपाल में आई बाढ़ की भयावह तस्वीरों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है. बिहार में कोसी नदी बेसिन से जुड़े जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है और संभावित प्रभावित क्षेत्रों में तैयारियां तेज कर दी गई हैं.
बगहा समेत कई इलाकों में लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए सतर्क किया जा रहा है. प्रशासन लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रहा है. सरकार का कहना है कि खतरे की आशंका जरूर है, लेकिन हालात को नियंत्रण में रखने के लिए सभी जरूरी इंतजाम कर लिए गए हैं.
भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भी अपनी सभी यूनिट्स को अलर्ट कर दिया है. राहत और बचाव कार्यों के लिए 11 टीमों को सक्रिय किया गया है, जबकि 7 अतिरिक्त टीमों को स्टैंडबाय रखा गया है. सीमा से लगे इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके.
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और स्थिति को किसी भी कीमत पर नियंत्रण से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा. जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन लगातार समन्वय के साथ काम कर रहे हैं.
बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, कुशीनगर, गोरखपुर और सिद्धार्थनगर जिलों में भी प्रशासन सतर्क हो गया है. इन जिलों में NDRF, SDRF और PAC की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
विशेषज्ञों के मुताबिक नेपाल के उत्तरी इलाके में ग्लेशियर पिघलने और अचानक आई फ्लैश फ्लड की वजह से भारी तबाही हुई है. कई गांव, पुल, सड़कें, वाहन और जल विद्युत परियोजनाएं नुकसान की चपेट में आई हैं. इसका असर भारत के तराई क्षेत्र में भी पड़ सकता है.
हालांकि गोरखपुर प्रशासन का कहना है कि फिलहाल जिले में बड़े खतरे जैसी स्थिति नहीं है. जिलाधिकारी दीपक मीणा के अनुसार राप्ती और घाघरा नदियों का जलस्तर नियंत्रण में है और गंडक नदी पर ज्यादा असर देखने को मिल सकता है. इसके बावजूद सभी एजेंसियों को सतर्क रखा गया है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी है.
प्रशासन का कहना है कि नेपाल में हो रहे मौसम और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है. यदि स्थिति बिगड़ती है तो प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया जाएगा. फिलहाल बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है.
नेपाल में आई बाढ़ से अबतक करीब 500 से ज्यादा लोग लापता हैं, उसमें 130 से ज्यादा भारतीय भी शामिल हैं. इसमें कैलाश मानसरोवर यात्रा के श्रद्धालु भी हैं. सबसे ज्यादा असर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के पर्यटक हैं. तमिलनाडु के 37 और पश्चिम बंगाल के 32 लोगों का कोई सुराग नहीं मिला है..जिनकी तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
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