Monsoon 2026: 17 साल में सबसे कमजोर मॉनसून का खतरा, सितंबर में बारिश और घटी तो कपास-सोयाबीन समेत कई फसलों पर संकट

Monsoon 2026: 17 साल में सबसे कमजोर मॉनसून का खतरा, सितंबर में बारिश और घटी तो कपास-सोयाबीन समेत कई फसलों पर संकट

भारत में इस साल मॉनसून सामान्य से करीब 15% कमजोर रहने का अनुमान है, जो 2009 के बाद सबसे कम बारिश वाला सीजन हो सकता है. अल नीनो के असर से खरीफ फसलों, बांधों के जलस्तर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है. सितंबर में बारिश की कमी कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों की पैदावार को प्रभावित कर सकती है.

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17 साल में सबसे कमजोर मॉनसून, सितंबर में बारिश और घटी तो कई फसलों पर संकटभारत में मॉनसून की बारिश की कमी

भारत में इस बार का मॉनसून बेहद कमजोर साबित होने जा रहा है. बारिश के हालिया ट्रेंड को देखें तो साफ पता चलता है कि मॉनसून की असमान बारिश ने खेती से लेकर बांधों में पानी के स्तर को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है. कई क्षेत्रों में खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ गई है जबकि कहीं-कहीं जरूरत से अधिक बारिश से फसलें बर्बाद हुई हैं. मॉनसून की बेरुखी का यह सिलसिला अब भी जारी है. कई राज्य इसकी चपेट में हैं. इन सबके पीछे अल नीनो को बड़ा कारण बताया जा रहा है. 'रॉयटर्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीजन में बारिश लंबे समय के औसत (LPA) से लगभग 15% कम रहने का अनुमान है, जो 2009 के बाद सबसे कम है.

कमजोर मॉनसून से भारत में फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है, खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में कमाई कम हो सकती है, क्योंकि देश की सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा इसी मॉनसून से मिलता है.

सितंबर में कैसा रहेगा बारिश का पैटर्न?

सितंबर का महीना फसल पकने के लिए बहुत अहम होता है. अगर इस दौरान अच्छी बारिश नहीं हुई, तो कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों जैसी गर्मियों में बोई जाने वाली फसलों की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है. साथ ही, गेहूं और रेपसीड जैसी सर्दियों में बोई जाने वाली फसलों के लिए जरूरी मिट्टी की नमी भी कम हो सकती है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कहा, "हम मॉनसून की बारिश पर अल नीनो का असर देख रहे हैं. सितंबर में इसके और गंभीर होने की संभावना है और बारिश में दो अंकों (डबल-डिजिट) की कमी देखी जा सकती है." 

उन्होंने कहा कि जून-सितंबर के सीजन के दौरान भारत में औसत से 15% कम बारिश हो सकती है, यानी सामान्य बारिश का 85% हिस्सा ही मिल सकता है. यह 2009 के बाद सबसे कम बारिश होगी. यह मौसम विभाग के शुरुआती अनुमान में बताई गई 8% की कमी से लगभग दोगुना होगा.

औसत से कम बारिश का अनुमान

आईएमडी अधिकारी ने कहा कि देश के कुछ पूर्वी राज्यों को छोड़कर, सितंबर में ज्यादातर हिस्सों में औसत से कम बारिश होने की संभावना है, जिससे सीजनल कमी और बढ़ जाएगी. उम्मीद है कि IMD इस महीने के आखिर में सितंबर के लिए अपना आधिकारिक अनुमान जारी करेगा.

मौसम विभाग के एक दूसरे सूत्र ने कहा कि अगर कोई नया मौसम सिस्टम नहीं बनता है, तो इस साल मॉनसून अगले महीने सामान्य समय से कुछ दिन पहले ही देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से वापस लौटना शुरू कर सकता है.  आमतौर पर मॉनसून जून में शुरू होता है और 17 सितंबर तक देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से वापस लौटना शुरू कर देता है, और अक्टूबर के मध्य तक पूरे देश से खत्म हो जाता है.

उन्होंने कहा कि अल नीनो मजबूत हो रहा है और सितंबर में इसके और तेज होने की संभावना है, जिससे भारत में बारिश कम हो सकती है. अल नीनो एक ऐसा मौसम पैटर्न है जिसमें मध्य और पूर्वी इक्वेटोरियल प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. यह दुनिया भर के मौसम के पैटर्न को बिगाड़ देता है और दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में सूखा जैसे हालात पैदा कर सकता है.

अल नीनो ने मॉनसून को थकाया

पहले भी, भारत में अल नीनो वाले अधिकतर सालों में औसत से कम बारिश हुई है. कभी-कभी इसके कारण भयंकर सूखा पड़ा, जिससे फसलें बर्बाद हो गईं और अधिकारियों को कुछ अनाजों के निर्यात पर रोक लगानी पड़ी.

1 जून को मॉनसून का मौसम शुरू होने के बाद से भारत में औसत से 13% कम बारिश हुई है. जून में बारिश औसत से 35.4% कम थी, हालांकि जुलाई में 1% ज़्यादा बारिश से थोड़ी राहत मिली थी. अगस्त में मॉनसून फिर से कमजोर पड़ गया और अब तक बारिश औसत से 15% कम रही है.

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