कर्नाटक में बारिश ने बढ़ाई टेंशन, 101 तालुक सूखे की चपेट में, सूख रही फसलें

कर्नाटक में बारिश ने बढ़ाई टेंशन, 101 तालुक सूखे की चपेट में, सूख रही फसलें

कर्नाटक में बारिश की कमी से सूखे जैसे हालात बन गए हैं. 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने के योग्य पाया गया है. कम बारिश से फसलें सूख रही हैं और 132 तालुकों में भूजल स्तर नीचे चला गया है. सरकार ने पीने के पानी, पशुओं के चारे, फसल बीमा और ग्रामीण रोजगार के लिए तैयारी तेज कर दी है.

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कर्नाटक में बारिश ने बढ़ाई टेंशन, 101 तालुक सूखे की चपेट में, सूख रही फसलेंसूखे का खतरा

कर्नाटक में इस साल बारिश कम होने से सूखे जैसे हालात बन गए हैं. राज्य के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने गुरुवार को बताया कि 1 जून से 26 अगस्त 2026 तक राज्य में 465 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस समय तक करीब 666 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी. यानी राज्य में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है. उन्होंने बताया कि तटीय कर्नाटक में बारिश की कमी करीब 24 प्रतिशत रही. दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में यह कमी 41 प्रतिशत तक पहुंच गई. आंतरिक कर्नाटक में 31 प्रतिशत और मलनाड क्षेत्र में 35 प्रतिशत बारिश कम हुई है. परमेश्वर ने कहा कि जून महीने में इतनी कम बारिश साल 1976 के बाद देखने को नहीं मिली थी. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार बारिश की स्थिति कितनी खराब रही है.

101 तालुकों में सूखे जैसे हालात

सरकार ने बारिश की कमी को देखते हुए पहले 134 तालुकों की पहचान की थी. इसके बाद इन जगहों पर जाकर जमीन की स्थिति देखी गई. इस जांच के बाद 101 तालुकों को सूखे से प्रभावित घोषित करने के योग्य पाया गया. इन 101 तालुकों में से 89 को गंभीर और 12 को सामान्य से ज्यादा प्रभावित यानी मध्यम श्रेणी में रखा गया है. सरकार अब हर 15 दिन में इन इलाकों की स्थिति की जांच करेगी. अगर किसी दूसरे इलाके में भी हालात खराब मिलते हैं तो उसे भी सूखा प्रभावित घोषित किया जा सकता है.

सरकार इसके लिए केंद्र सरकार के तय नियमों को देख रही है. इसमें यह देखा जाता है कि कितने दिनों तक बारिश नहीं हुई, कितनी जमीन पर फसल बोई गई, फसल की हालत कैसी है, मिट्टी में नमी कितनी है और जमीन के नीचे पानी कितना बचा है. तालाब, झील और बांधों में पानी की स्थिति भी देखी जाती है.

लक्ष्य से काफी कम हुई खेती

बारिश कम होने का सीधा असर खेती पर पड़ा है. उपमुख्यमंत्री के अनुसार कर्नाटक में इस बार करीब 84 लाख हेक्टेयर जमीन पर फसल बोने का लक्ष्य था. लेकिन अभी तक करीब 60 लाख हेक्टेयर जमीन पर ही बुवाई हो पाई है. बारिश की कमी के कारण बोई गई फसलें भी कई जगह सूखने लगी हैं. रागी की करीब 50 प्रतिशत लक्षित जमीन पर बुवाई हुई. मूंगफली की करीब 57 प्रतिशत, मक्का की 34 प्रतिशत और अरहर की करीब 84 प्रतिशत जमीन पर बुवाई हुई. बारिश कम होने से इन फसलों पर भी बुरा असर पड़ा है. किसानों के खेतों में फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

मिर्च, प्याज और टमाटर की फसल भी प्रभावित

कम बारिश का असर केवल अनाज वाली फसलों पर ही नहीं पड़ा है. बागवानी की फसलें भी इससे प्रभावित हुई हैं. खासकर मिर्च, प्याज और टमाटर की फसल को कम बारिश के कारण नुकसान हुआ है. अगर आगे भी बारिश कम रही तो इन फसलों पर असर और बढ़ सकता है. इससे किसानों की आमदनी पर भी असर पड़ने की आशंका है.

जमीन के नीचे भी कम हो रहा पानी

बारिश कम होने से जमीन के अंदर का पानी भी नीचे चला गया है. सरकार के अनुसार 132 तालुकों में भूजल का स्तर पिछले 10 साल के औसत से नीचे पहुंच गया है. कुछ इलाकों में भूजल स्तर में 1,000 फीट से ज्यादा की गिरावट भी दर्ज की गई है. इसका मतलब है कि कई जगह पुराने बोरवेल भी सूख सकते हैं. ऐसे में किसानों और गांव के लोगों के सामने पानी की बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है.

बांधों में भी पिछले साल से कम पानी

कर्नाटक के बांधों में भी पिछले साल के मुकाबले कम पानी है. सरकार के अनुसार इस समय राज्य के जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की इसी अवधि से काफी कम है. कावेरी बेसिन के प्रमुख जलाशयों में कृष्णा राजा सागर में करीब 61 प्रतिशत, काबिनी में 66 प्रतिशत, हेमावती में 83 प्रतिशत और हरंगी में 99 प्रतिशत पानी है. कावेरी बेसिन में कुल मिलाकर करीब 72 प्रतिशत जल भंडारण बताया गया है. वहीं कृष्णा बेसिन में घटप्रभा में करीब 100 प्रतिशत, भद्रा में 82 प्रतिशत, तुंगभद्रा में 90 प्रतिशत, मालाप्रभा में 60 प्रतिशत, नारायणपुर में 100 प्रतिशत और अलमट्टी में 99 प्रतिशत जल भंडारण बताया गया है. राज्य के सभी जलाशयों को मिलाकर कुल जल भंडारण करीब 76 प्रतिशत है.

गांवों में पीने के पानी की तैयारी

बारिश कम होने से सरकार को पीने के पानी की भी चिंता है. कई जगह बोरवेल और पानी के दूसरे स्रोत सूखने लगे हैं. ऐसे इलाकों में टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है. सरकार के अनुसार अभी 149 ग्राम पंचायतों में टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है. इसके अलावा 18 स्थानीय निकायों के 114 वार्डों में 48 टैंकर पानी पहुंचा रहे हैं. जहां बोरवेल सूख गए हैं, वहां अधिकारियों को नए बोरवेल खोदने के निर्देश दिए गए हैं. जहां पानी का कोई स्रोत उपलब्ध है, वहां पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की भी तैयारी की जा रही है. सरकार के आकलन के अनुसार करीब 2,559 ग्राम पंचायतों में आने वाले समय में पीने के पानी की गंभीर समस्या हो सकती है. इसलिए सरकार पहले से ही तैयारी कर रही है.

पशुओं के लिए चारे की भी तैयारी

बारिश कम होने से सिर्फ इंसानों के लिए ही पानी की समस्या नहीं है. पशुओं के लिए चारे की कमी का भी डर है. सरकार के पास अभी करीब 151 लाख टन चारा है, जो लगभग 33 हफ्ते तक चल सकता है. हालांकि 40 से 50 तालुकों में चारे का स्टॉक 20 हफ्ते से कम समय के लिए ही है. पावागड़ा तालुक में चारे का स्टॉक करीब 11 हफ्ते तक चलने की बात कही गई है. सरकार ने चारे के लिए 25 करोड़ रुपये जारी किए हैं. किसानों को चारे के बीज और दूसरी जरूरी चीजें भी दी जा रही हैं, ताकि जहां पानी उपलब्ध है वहां किसान पशुओं के लिए चारा उगा सकें.

किसानों के लिए फसल बीमा का सहारा

बारिश की कमी से फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को फसल बीमा से भी मदद मिलने की उम्मीद है. सरकार के अनुसार करीब 49 लाख किसानों ने फसल बीमा का प्रीमियम जमा किया है. सरकार ने बीमा कंपनियों को पात्र किसानों और फसलों को ‘प्रिवेंटिव सोइंग’ यानी खराब मौसम की आशंका के कारण फसल बोने के बाद नुकसान होने वाली श्रेणी में शामिल करने के निर्देश दिए हैं. इससे पात्र किसानों को बीमा का लाभ मिल सकता है.

गांवों में रोजगार बढ़ाने की तैयारी

सरकार सूखे जैसे हालात में लोगों को काम देने की भी कोशिश कर रही है. इसका मकसद यह है कि गांव के लोगों को काम के लिए दूसरे शहरों या राज्यों में जाने की जरूरत न पड़े. इसके लिए ग्रामीण इलाकों में तालाबों, झीलों और दूसरे कामों से जुड़े रोजगार बढ़ाए जा रहे हैं. जिला अधिकारियों को कृषि मजदूरों के लिए ज्यादा काम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार के अनुसार अब तक ऐसे कामों के जरिए करीब 66 लाख व्यक्ति-दिवस का रोजगार दिया जा चुका है. इसका मतलब है कि लाखों दिनों के बराबर लोगों को काम मिला है.

पानी के लिए करोड़ों रुपये जारी

पीने के पानी की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने जिलों को 117 करोड़ रुपये जारी किए हैं. इसके अलावा 224 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 189 करोड़ रुपये दिए गए हैं. बेंगलुरु को इसमें शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि वहां पानी की व्यवस्था के लिए अलग से काम किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि सूखे जैसे हालात के बीच लोगों को पीने का पानी, पशुओं के लिए चारा और रोजगार देने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है.

सरकार की नजर हर इलाके पर

उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि सरकार हर तालुक और हर होबली की स्थिति पर नजर रख रही है. जहां हालात ज्यादा खराब होंगे, वहां जरूरत के हिसाब से कदम उठाए जाएंगे. कर्नाटक में कम बारिश ने किसानों, गांवों और पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि लोगों को पानी और चारे की कमी न हो और किसानों को फसल खराब होने की स्थिति में जरूरी मदद मिल सके. आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और जमीन पर पानी की उपलब्धता के आधार पर सरकार आगे के फैसले लेगी.

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