PMFBY में क्या है मुआवजे का Beed Formula? अल नीनो में किसानों को ऐसे मिलेगी राहत

PMFBY में क्या है मुआवजे का Beed Formula? अल नीनो में किसानों को ऐसे मिलेगी राहत

अल नीनो की आशंका के बीच किसानों में फसल बीमा को लेकर असमंजस की स्थिति है. किसान सोच में पड़े हैं कि अल नीनो से अगर फसल चौपट होती है तो उन्हें फसल बीमा का मुआवजा मिलेगा या नहीं. अगर मिलेगा भी तो कितना?

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PMFBY में क्या है  मुआवजे का Beed Formula? अल नीनो में किसानों को ऐसे मिलेगी राहतफसलों पर सुपर अल नीनो का खतरा

अल नीनो की आशंका के बीच किसानों में फसल नुकसान का डर सताने लगा है. किसानों के साथ सरकार और बीमा कंपनियां भी चिंता में पड़ गई हैं. अगर अल नीनो एक्टिव होता है और सूखे के हालात बनते हैं तो फसलों को भारी नुकसान होगा. इस नुकसान की सूरत में किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से उम्मीदें बढ़ जाती हैं क्योंकि उन्हें आपदा के प्रति सुरक्षा मिलती है. हालांकि बीमा कंपनियों और सरकार का इसका दबाव बढ़ता है क्योंकि अल नीनो के समय नुकसान अधिक होता है और मुआवजे की राशि बढ़ जाती है.

एक्सपर्ट का मानना है कि अल नीनो के हालात कई साल बाद बनते हैं, इसलिए बीमा कंपनियों को किसानों की मदद में जरा भी देरी नहीं करनी चाहिए. राज्य सरकारों को भी इसके लिए फौरी तौर पर तैयार रहना चाहिए.

अल नीनो की आशंका 

कई विदेशी मौसम एजेंसियों और भारत मौसम विज्ञान संस्थान (IMD) ने इस बार अल नीनो की आशंका जताई है. कुछ एजेंसियों ने मई अंत में तो कुछ ने जून से अल नीनो के एक्टिव होने की खबर दी है. सबकी बातों में एक सूचना कॉमन है कि इस बार अल नीनो की संभावना शत-प्रतिशत है जिसके आसार अभी से दिखने लगे हैं. ऐसी परिस्थिति में किसानों के सामने बड़ा डर है कि वे खेती करें या नहीं. खरीफ का सीजन माथे पर है और किसानों ने कई दिन पहले से इसकी तैयारी शुरू कर दी है. अब वे खेत और खेती छोड़ कर भाग नहीं सकते. ऐसे में पूरी जिम्मेदारी बीमा कंपनियों और राज्य सरकारों की है कि वे किसानों को फसल बीमा कराने के लिए तैयार करें और भविष्य के खतरे को देखते हुए अभी से तैयारी शुरू कर दें.

इन फसलों पर होगा असर

खरीफ में  मुख्य तौर पर धान, मक्का, दाल और तिलहन की खेती होती है. ये सभी फसलें किसानों का स्टोर भरने के साथ ही सरकारी बफर स्टॉक को भी भरती हैं. लेकिन इस बार अल नीनो ने बड़े खतरे के संकेत दिए हैं. अगर अच्छी बारिश नहीं हुई, सूखे की नौबत आई तो न किसान का खलिहान भरेगा और न ही सरकार का बफर स्टॉक. ऐसी विपरीत परिस्थिति में किसानों का हौसला बढ़ाने के लिए बीमा कंपनियों और सरकार को आगे आना होगा ताकि खरीफ का रकबा न घटे और फसलों की रोपाई-बुवाई सामान्य तौर पर चलती रहे. इस काम में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बड़ा रोल निभा सकती है.

PMFBY का बड़ा रोल

रिस्क कवरेज: PMFBY किसानों को बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक, हर फेज में बड़ा बीमा कवरेज देता है. इसमें मौसम के बीच आने वाली मुश्किलें (जैसे सूखा पड़ना) और किसी खास इलाके में आने वाली आपदाएं भी शामिल हैं.

जब अल नीनो का असर बहुत अधिक होता है, तो बड़े पैमाने पर फसलें खराब हो जाती हैं, जिससे बीमा के लिए बहुत सारे दावे आते हैं. बीमा कंपनियां अक्सर मॉनसून से पहले, जोखिम के अनुमानों के आधार पर, बीमा की दरें (प्रीमियम) काफी अधिक रखती हैं. इससे किसानों पर दबाव बढ़ता है, उनके खर्चे भी बढ़ जाते हैं. अगर सरकारों का सही ढंग से कंट्रोल न हो तो बीमा कंपनियों के भारी-भरकम प्रीमियम में किसान फंस कर रह जाता है.

क्या है बीड फॉर्मूला 

किसानों को भारी खर्च से बचाने और फसल बीमा कराने के लिए सरकार ने कुछ खास बंदोबस्त किए हैं जिनमें एक बीड फॉर्मूला भी है. सूखे की आशंका वाले इलाकों की समस्याओं से निपटने के लिए, कुछ राज्य PMFBY के "बीड फॉर्मूला" (80:110 योजना) का इस्तेमाल करते हैं. अगर बीमा के दावे, प्रीमियम की रकम के 80% से कम रहते हैं, तो बीमा कंपनियां 20% अपने पास रख लेती हैं और बाकी रकम वापस कर देती हैं. वहीं, अगर दावे 110% से ज्यादा हो जाते हैं, तो राज्य सरकार उन अतिरिक्त दावों का भुगतान करती है. इससे किसानों को भारी राहत मिल जाती है. इस बार के अल नीनो की आशंका के बीच बीड फॉर्मूले से उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं.

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