सीएम रेवंत रेड्डी (फाइल फोटो-एएनआई)तेलंगाना में किसानों को दी जा रही 24 घंटे मुफ्त बिजली को लेकर सियासत तेज हो गई है. मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने साफ कहा है कि उनकी सरकार कृषि क्षेत्र के लिए निर्बाध और मुफ्त बिजली आपूर्ति जारी रखेगी. उन्होंने विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि रेवंत सरकार इस योजना को बंद करने या कृषि पंपसेटों पर स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री ने बीआरएस नेतृत्व को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस सरकार किसानों को मुफ्त बिजली देने के अपने वादे से पीछे हटती है तो कांग्रेस अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी.
साथ ही उन्होंने बीआरएस से भी इसी तरह की सार्वजनिक घोषणा करने को कहा. रेवंत रेड्डी ने दावा किया कि किसानों को मुफ्त बिजली देने की अवधारणा को आगे बढ़ाने में कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और यह योजना राज्य के कृषि ढांचे का अहम हिस्सा बन चुकी है.
एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, रेवंत रेड्डी ने पूर्ववर्ती बीआरएस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कृषि पंपसेटों पर स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया की शुरुआत उनकी सरकार ने नहीं, बल्कि पहले की सरकार ने केंद्र के साथ हुए समझौते के जरिए की थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ा.
मुख्यमंत्री ने किसानों की फसल खरीद का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर भी दबाव बनाया. उन्होंने कहा कि अगर निर्धारित समय तक धान की खरीद नहीं हुई और अन्य फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नहीं खरीदा गया तो किसानों की उपज भाजपा और बीआरएस नेताओं के घरों के बाहर पहुंचाई जाएगी. उन्होंने मांग की कि जिन फसलों के लिए एमएसपी घोषित किया जाता है, उनकी सरकारी खरीद भी सुनिश्चित की जानी चाहिए.
कृषि और सिंचाई क्षेत्र में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने 'रायतु डिस्कॉम' बनाने का प्रस्ताव रखा है. राज्य सरकार का मानना है कि इससे बिजली खरीद और वितरण प्रणाली में सुधार होगा. साथ ही अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर उपयोग कर वित्तीय बोझ कम किया जा सकेगा और बिजली वितरण कंपनियों को मजबूती मिलेगी.
राज्य सरकार के अनुसार, तेलंगाना में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है. कुछ वर्षों में बिजली खपत 15 हजार मेगावाट से बढ़कर 18 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है. सरकार का कहना है कि यह वृद्धि कृषि गतिविधियों के विस्तार और आर्थिक विकास का संकेत है. मुख्यमंत्री ने दोहराया कि किसानों के हितों की रक्षा और ग्रामीण समृद्धि को मजबूत करना उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, जिसके लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति और कृषि कल्याण योजनाएं जारी रहेंगी. (एएनआई)
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