
उत्तर प्रदेश सरकार नदियों में प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी अब सोलर बोट चलाने की दिशा में काम कर रही है. पहले चरण में उत्तर प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थल अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज और गढ़मुक्तेश्वर में सोलर बोट की शुरुआत होगी. सबसे पहले अयोध्या में इसकी शुरुआत होगी. एक करोड़ कीमत की 2 बोट खरीदने के टेंडर प्रक्रिया भी अब शुरू कर दी गई है. सोलर बोट(Solar boats) के संचालन से डीजल से चलने वाली बोट से नदियों में होने वाला प्रदूषण भी खत्म होगा. नेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी एस.डी दुबे का कहना है कि सोलर बोट के संचालन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा. 5 शहरों से इसकी शुरुआत करने के बाद प्रदेश के हर धार्मिक स्थल पर इस सुविधा की तैयारी चल रही है.
उत्तर प्रदेश में नदियों में सबसे ज्यादा नाव का संचालन काशी, प्रयागराज और अयोध्या में होता है. अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसीलिए अब सरयू नदी में सबसे पहले सोलर बोट का संचालन होगा. सोलर बोट के माध्यम से श्रद्धालु सरयू में दर्शन पूजन कर सकेंगे. मार्च 2024 से पहले सोलर बोट के संचालन की तैयारी है. वहीं पांच शहरों में संचालन के बाद चित्रकूट ,आगरा ,गोरखपुर, जौनपुर सहित नदी के किनारे वाले शहरों में यह सुविधा शुरू होगी. नेडा का प्रयास है कि हर नदी के किनारे बसे शहरों में सोलर बोट का संचालन किया जाए.
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अभी तक सरकारी क्षेत्र में देश के किसी भी राज्य में सोलर बोट की सुविधा नहीं दी गई है. उत्तर प्रदेश के 5 शहरों में शुरू होने जा रहे सोलर बोट के संचालन के बाद उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य होगा जहां इस तरह की सुविधाएं मिलेंगी. नेडा के निदेशक अनुपम शुक्ला ने बताया की अयोध्या को सोलर सिटी बनाने की दिशा में यहीं से सोलर बोट की शुरुआत होगी .
अयोध्या में शुरू होने जा रहे सोलर बोट में एक साथ 15 लोग बैठ सकेंगे. वहीं नाव के छत पर सोलर पैनल लगे होंगे. सोलर बोट में सौर ऊर्जा एकत्र करने के उपकरण भी लगे होंगे जिससे नाव का संचालन होगा. केरल स्टेट इनलैंड नेवीगेशन कारपोरेशन ने पहली बार सौर ऊर्जा से चलने वाली नाव लांच की थी. इस नाव के ऊपर 27 किलो वाट ऊर्जा के पैनल लगे थे. इस नाव को श्रीलंका से मंगाया गया था.
उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार तरक्की कर रहा है. अयोध्या में सभी सरकारी कार्यालयों की छतों पर सोलर प्लेट लग चुकी है. वहीं अब तक 4.8 मेगा वाट के रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं. वहीं अब सरयू किनारे 200 करोड़ की लागत से 40 मेगावाट का प्लांट भी लगाया जा रहा है. यहां से तैयार होने वाली बिजली पावर कारपोरेशन को उपलब्ध कराई जाएगी. मिर्जापुर ,महोबा, झांसी सहित अन्य जनपदों में जलाशय वाले इलाकों में खाली पड़ी जमीन पर सोलर प्लांट के जरिए बिजली तैयार कर पावर कारपोरेशन को उपलब्ध कराने का नेडा का प्लान है जिससे कारपोरेशन को महंगी दर पर बिजली नहीं खरीदनी पड़ेगी.
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