मंडियों से लेकर खेतों तक पड़ताल: महाराष्ट्र में प्याज के गिरते दाम और नुकसान पर बड़ा अभियान शुरू, जानें पूरा शेड्यूल

मंडियों से लेकर खेतों तक पड़ताल: महाराष्ट्र में प्याज के गिरते दाम और नुकसान पर बड़ा अभियान शुरू, जानें पूरा शेड्यूल

महाराष्ट्र स्टेट अनियन प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन 12 अक्टूबर से राज्यभर में प्याज किसानों की समस्याओं का जायजा लेने के लिए दौरा शुरू कर रहा है. नासिक के कासमडे से होगी शुरुआत.

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मंडियों से लेकर खेतों तक पड़ताल, महाराष्ट्र में प्याज के गिरते दाम और नुकसान पर बड़ा अभियान शुरू12 अक्टूबर से प्याज किसानों का राज्यव्यापी दौरा (सांकेतिक तस्वीर-ITGD)

महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसानों की समस्याओं का धरातल पर जाकर जायजा लेने के लिए 'महाराष्ट्र स्टेट अनियन प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन' ने एक बड़े राज्यव्यापी दौरे (Statewide Tour) का खाका तैयार किया है. एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले की अगुवाई में यह दौरा सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होने जा रहा है.

इस दौरे का मुख्य उद्देश्य प्याज की खेती से लेकर भंडारण, नीलामी, बाजार भाव और किसानों को होने वाले नुकसान का सटीक और वैज्ञानिक अध्ययन करना है, ताकि राज्य सरकार और संबंधित मंडियों के समक्ष किसानों की मांगों को मजबूती से रखा जा सके.

नासिक के ऐतिहासिक 'कासमडे' इलाके से होगी शुरुआत

प्याज उत्पादन के प्रमुख गढ़ माने जाने वाले नासिक जिले के 'कासमडे' क्षेत्र से इस दौरे का आगाज होगा. इस बेल्ट में कलवन, सतना, देओला और मालेगांव तालुका शामिल हैं.

सोमवार, 12 अक्टूबर को सुबह 8 बजे नंदूरी स्थित सप्तश्रृंगी किले की पहली सीढ़ी पर श्रीफल चढ़ाकर दौरे की औपचारिक शुरुआत होगी. इसके बाद सुबह 9 बजे कलवन सब-मार्केट स्थित नाकोडा मार्केट का निरीक्षण किया जाएगा. दिनभर में पिलकोस, भदवन, विसापुर, देसराने और दोपहर 3 बजे अभोना में सरकारी और प्राइवेट प्याज बाजारों का जायजा लिया जाएगा.

एपीएमसी से लेकर प्राइवेट मंडियों का सीधा इंस्पेक्शन

दौरे के दौरान संगठन की टीम महाराष्ट्र की सभी बड़ी कृषि उपज मंडी समितियों (APMC), उनके उप-बाजारों और निजी प्याज मंडियों का रुख करेगी. इस दौरान नीलामी (Auction) प्रक्रिया की पारदर्शिता देखी जाएगी. किसानों को मिलने वाली अंतिम बिक्री रकम और उसमें होने वाली देरी का अध्ययन होगा. बाजार में प्याज के दामों में आने वाले अचानक उतार-चढ़ाव का किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाएगा.

प्याज की 'चॉल' और खेतों में जाकर समझेंगे नुकसान

केवल मंडियों तक सीमित न रहकर यह दल सीधे किसानों के खेतों और उनकी भंडारण संरचनाओं (प्याज की चॉल) में भी जाएगा. प्याज के भंडारण के दौरान सड़ांध और वजन में होने वाली कमी (Storage Loss), चॉल निर्माण और रखरखाव की लागत और बाजार भाव का इंतजार करने में किसानों को होने वाले जोखिम का अध्ययन किया जाएगा.

साथ ही, खेतों में जाकर प्याज उगाने की वास्तविक लागत (Production Cost) और बाजार में मिलने वाले दाम के बीच के बड़े अंतर को समझा जाएगा.

सरकार के सामने ठोस रिपोर्ट पेश करने की तैयारी

एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत दिघोले के अनुसार, इस दौरे में जुटाए गए आंकड़ों और किसानों के अनुभवों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी. इसी रिपोर्ट के दम पर संगठन आगे की रणनीतियां बनाएगा और केंद्र व राज्य सरकार के सामने प्याज किसानों की जायज मांगों को आंकड़ों के साथ पेश करेगा.

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