
मध्यप्रदेश का नर्मदापुरम जिला अब रेशम उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर चुका है. यह प्रदेश का पहला और इकलौता जिला बन गया है, जहां मलबरी, टसर, ईरी और मूंगा—चारों प्रकार के रेशम का उत्पादन किया जा रहा है. जिले के मालाखेड़ी, पचमढ़ी और मढ़ई स्थित रेशम केंद्र ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार के नए मॉडल बनकर उभर रहे हैं.
रेशम उद्योग के विस्तार से न केवल किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही है, बल्कि बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है.स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे रेशमी वस्त्र और साड़ियां अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट और अमेज़न तक पहुंच चुकी हैं, जिससे नर्मदापुरम के उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार मिल रहा है.
जिले का सबसे बड़ा रेशम केंद्र मालाखेड़ी सिल्क कैंपस में संचालित हो रहा है. यहां “फार्म टू फेब्रिक” मॉडल पर काम किया जा रहा है, जिसके तहत रेशम उत्पादन से लेकर धागा निर्माण और वस्त्र तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया एक ही परिसर में पूरी होती है.
वर्ष 2025 में यहां 742 किलोग्राम मलबरी सिल्क धागे का उत्पादन किया गया. इस कार्य से जुड़ी 32 महिलाओं को लगभग 5.78 लाख रुपये की मजदूरी मिली, जबकि धागे की ट्विस्टिंग यूनिट में कार्यरत 10 महिलाओं को 2.50 लाख रुपये का भुगतान किया गया. मालाखेड़ी में मध्यप्रदेश की पहली ककून मंडी भी संचालित हो रही है. यहां से 13,781 किलोग्राम ककून पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के व्यापारियों को भेजे गए, जिससे किसानों को करीब 52 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई.
मालाखेड़ी केंद्र में तैयार किए जा रहे “प्राकृत” ब्रांड के रेशमी परिधान, साड़ियां और अन्य उत्पाद अब स्थानीय बाजार के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी लोकप्रिय हो रहे हैं. इससे बुनकरों और महिला समूहों को सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर मिल रहा है.
पचमढ़ी रेशम केंद्र में पांच एकड़ क्षेत्र में मूंगा रेशम के लिए विशेष पौधरोपण किया गया है. यहां लगभग 500 ककून तैयार किए जा रहे हैं.वहीं मढ़ई रेशम केंद्र को “सिल्क टूरिज्म” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पर्यटक रेशम पालन से लेकर वस्त्र निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया को नजदीक से देख सकेंगे.
नर्मदापुरम जिले में वर्तमान में 16 मलबरी और 12 टसर रेशम केंद्र संचालित हैं. इन केंद्रों से हजारों किसान और ग्रामीण महिलाएं जुड़कर रोजगार और आय प्राप्त कर रही हैं.
वर्ष 2025 में जिले में 15,426.5 किलोग्राम मलबरी ककून उत्पादन दर्ज किया गया, जिससे 255 हितग्राहियों को सीधा लाभ मिला. वहीं टसर ककून उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 2.68 लाख किलोग्राम की वृद्धि दर्ज की गई.
मालाखेड़ी रेशम विकास केंद्र में अब रेशम आधारित मेडिकल उत्पादों का निर्माण भी शुरू हो गया है. फाई ब्रोहित कंपनी और सरदार वल्लभभाई पटेल पॉलिटेक्निक कॉलेज के सहयोग से यहां रेशम से पाउडर, क्रीम, सेरी बैंडेज और सिजेरियन बैंडेज जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.
रेशम केंद्रों के पुनः संचालन से ग्रामीण महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिला है, इससे “लखपति दीदी” अभियान को भी मजबूती मिल रही है. नर्मदापुरम का यह मॉडल अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है.
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