ग्रामीण महिलाओं को खेती की सिखाई जा रही नई तकनीकउत्तर प्रदेश में खेती की तस्वीर तेजी से बदलने जा रही है. कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 26,373 कृषि आजीविका सखियां योगी सरकार की योजनाओं को जमीनी हकीकत में बदलने के लिए तैनात की गई हैं. जो अब प्रदेश के गांव-गांव में आधुनिक खेती का मंत्र फैला रही हैं. महिला सशक्तिकरण और कृषि सुधार को एक साथ आगे बढ़ाने वाला यह अभियान प्रदेश को आत्मनिर्भर कृषि मॉडल की ओर ले जा रहा है.
प्रदेश के 75 जिलों के 826 विकास खंडों में सक्रिय ये कृषि आजीविका सखियां किसानों को पारंपरिक खेती से निकालकर वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती से जोड़ रही हैं. साथ ही मिट्टी की जांच, जैविक खाद निर्माण, प्राकृतिक कीट नियंत्रण, उन्नत बीज चयन जैसी तकनीकों के जरिए खेती की लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाने के तरीके बता रही हैं.
ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक में सिर्फ फसल उत्पादन ही नहीं, बल्कि पशुपालन, मुर्गी पालन और बकरी पालन जैसे आजीविका विकल्पों को भी मजबूती दी जा रही है. इसके जरिए आय के स्रोत बढ़ रहे हैं और किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं.
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि कृषि आजीविका सखियां खेत-खलिहान में बदलाव की असली ताकत बन चुकी हैं. ये महिलाएं किसानों को तकनीकी जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने का भी काम कर रही हैं.
योगी सरकार की मंशा साफ है. खेती को लाभ का संसाधन बनाना और ग्रामीण महिलाओं को विकास की धुरी बनाना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता है. उत्तर प्रदेश अब महिला शक्ति, आधुनिक खेती और आत्मनिर्भर गांवों का मॉडल बनकर उभर रहा है. इसके अंतर्गत ही किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि आजीविका सखियां पूरे प्रदेश में प्राकृतिक खेती के प्रचार के लिए जागरूकता सत्र भी चला रही हैं.
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