मनरेगा में 800 रुपये हो मजदूरी, स्कीम का बजट बढ़ाए सरकार...इन मांगों पर 2 दिन विरोध प्रदर्शन करेगा संघर्ष मोर्चा

मनरेगा में 800 रुपये हो मजदूरी, स्कीम का बजट बढ़ाए सरकार...इन मांगों पर 2 दिन विरोध प्रदर्शन करेगा संघर्ष मोर्चा

मनरेगा संघर्ष मोर्चा ने सरकार के उस दावे को खारिज किया है कि स्कीम के बजट में सालाना 20,000 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है. सिविल सोसायटी के कार्यकर्ताओं ने इस बात से भी इनकार किया है कि मनरेगा मजदूरों को समय पर पैसा दिया जाता है. मनरेगा संघर्ष मोर्चा ने इस तरह के मुद्दों पर 6 दिसंबर से दो दिनों के लिए विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है.

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मनरेगा में 800 रुपये हो मजदूरी, स्कीम का बजट बढ़ाए सरकार...इन मांगों पर विरोध प्रदर्शन करेगा संघर्ष मोर्चामनरेगा स्कीम में मजदूरी बढ़ाने की मांग

ग्राणीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) मांग पर आधारित स्कीम है और इसके बजट में किसी तरह की कमी होती है तो उसे पूरा करने के लिए वित्त मंत्रालय से अतिरिक्त बजट मांगा जाता है. चौहान ने कहा कि राज्यों की मांग के मुताबिक इस योजना के बजट में रिवीजन किया जाता है और फंड उपलब्ध कराया जाता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी राज्य में मनरेगा का बजट कम पड़ता है तो इसके लिए फंड मांगा जाएगा.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनके मंत्रालय ने मनरेगा के बजट का 56 हिस्सा अभी तक के 8 महीनों में खर्च किया है. केंद्रीय मंत्री ने इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय की बड़ी उपलब्धि बताई. शिवराज सिंह चौहान का बयान ऐसे समय में सामने आया है जब सिविल सोसायटी के कार्यकर्ताओं ने सरकार पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है. 

संघर्ष मोर्चा का विरोध

मनरेगा संघर्ष मोर्चा ने सरकार के उस दावे को खारिज किया है कि स्कीम के बजट में सालाना 20,000 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है. सिविल सोसायटी के कार्यकर्ताओं ने इस बात से भी इनकार किया है कि मनरेगा मजदूरों को समय पर पैसा दिया जाता है.

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मशहूर अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने कहा है कि मनरेगा मजदूरों के लिए फंड ट्रांसफर ऑर्डर (FTO) भले ही पहले जारी कर दिए जाते हैं, लेकिन उनके खाते में पैसा क्रेडिट होने में कई हफ्ते या महीने लग जाते हैं. ज्यां द्रेज सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम और नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत काम करने वाली ऑनलाइन हाजिरी के नियमों पर भी निशाना साधा. कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस तरह के नियमों से तकरीबन 9 करोड़ लोगों के जॉब कार्ड सिस्टम से डिलिट हो गए हैं.

6 दिसंबर से प्रदर्शन

मनरेगा संघर्ष मोर्चा ने इस तरह के मुद्दों पर 6 दिसंबर से दो दिनों के लिए विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. मोर्चा ने कहा है कि मनरेगा के लिए पर्याप्त बजट नहीं देना और स्कीम में टेक्निकल दखलंदाजी के खिलाफ वे विरोध प्रदर्शन करेंगे. 

एक बयान में कहा गया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) के श्रमिकों ने सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया है कि इस योजना के लिए बजट में बढ़ोतरी की गई है. उन्होंने यह भी मांग की कि इस योजना के तहत मजदूरी बढ़ाकर 800 रुपये प्रतिदिन की जाए.

बयान के अनुसार, झारखंड नरेगा वॉच की अफसाना खातून ने कहा कि अपर्याप्त बजट के कारण मजदूरी भुगतान में गंभीर देरी हुई और पैसा समाप्त होने के बाद मांग पर काम देने से इनकार कर दिया गया.

सरकार का बयान

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि हर साल औसतन 60 लाख नए जॉब कार्ड मनरेगा के तहत जारी किए जाते हैं और जॉब कार्डों को हटाने में सरकार की कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास बजट का 57 प्रतिशत हिस्सा मनरेगा के लिए आवंटित किया गया था और उन्होंने जोर देकर कहा कि आधार-सीडिंग से पारदर्शिता बढ़ी है.

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लोकसभा में एक लिखित उत्तर में, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लाभार्थियों के खातों में सीधे भुगतान के लिए एक एसओपी जारी की गई थी और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा इसे सही ढंग से लागू करने के लिए नियमित आधार पर निगरानी की जा रही है.

 

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