सीतापुर में ‘किसान कारवां’ का 31वां पड़ाव, बिसवां के लालपुर गांव में जुटे किसान

सीतापुर में ‘किसान कारवां’ का 31वां पड़ाव, बिसवां के लालपुर गांव में जुटे किसान

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं, जिनका समाधान विभागीय अधिकारियों ने अलग-अलग चरणों में किया. साथ ही इफको, चंबल फर्टिलाइजर्स और हार्वेस्ट प्लस के विशेषज्ञों ने कृषि में उर्वरकों के संतुलित उपयोग और उनके लाभ के बारे में जानकारी दी.

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सीतापुर में ‘किसान कारवां’ का 31वां पड़ाव, बिसवां के लालपुर गांव में जुटे किसानकिसान कारवां

चीनी उद्योग का केंद्र और दशहरी आम के लिए प्रसिद्ध, गेहूं, धान, सरसों जैसी पारंपरिक फसलों के साथ मेंथा और खस जैसी नकदी फसलों की खेती के लिए पहचान रखने वाले जनपद सीतापुर में ‘किसान तक’ का किसान कारवां अपने 31वें पड़ाव के रूप में विकासखंड बिसवां के लालपुर गांव पहुंचा. इस जिले की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार आज भी कृषि और पशुपालन से जुड़े उद्योग ही हैं. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों में चल रही इस विशेष कवरेज के दौरान लालपुर गांव में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर आधुनिक खेती से जुड़ी जानकारियां हासिल कीं. इस अवसर पर कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों, स्वयं सहायता समूहों और प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.

उर्वरकों के सही उपयोग पर हुई चर्चा

धान, गेहूं और गन्ना के साथ-साथ हाल के वर्षों में खस की खेती, डेयरी उद्योग और जैविक खेती की ओर बढ़ते कदमों के लिए पहचान बना रहा जनपद सीतापुर में जब ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, तो गांव के किसानों के चेहरों पर विशेष उत्साह देखने को मिला. कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं, जिनका समाधान विभागीय अधिकारियों ने अलग-अलग चरणों में किया. साथ ही इफको, चंबल फर्टिलाइजर्स और हार्वेस्ट प्लस के विशेषज्ञों ने कृषि में उर्वरकों के संतुलित उपयोग और उनके लाभ के बारे में जानकारी दी. कार्यक्रम के अंत में अतिथियों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया साथ ही लकी ड्रॉ के माध्यम से 15 किसानों को नकद पुरस्कार भी दिए गए.

पोषण वाटिका के जरिए महिलाएं करें अच्छी कमाई

प्रथम चरण में कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. रीमा ने किसानों को पोषण वाटिका के बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि खेतों से जो उत्पाद मिलते हैं, उनसे बनने वाले उत्पादों को यथासंभव घर पर ही तैयार करें, न कि बाजार से खरीदें. इनमें कई प्रकार के उत्पाद शामिल हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसी उत्पाद को बनाने में किसी प्रकार की दिक्कत आती है तो महिलाएं कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकती हैं. वहां उन्हें यह जानकारी दी जाएगी कि इन उत्पादों को कैसे तैयार किया जाता है और अलग-अलग अनाजों से कौन-कौन से उत्पाद बनाए जा सकते हैं.

चंबल फर्टिलाइजर के उत्पादों से बढ़ेगी आय

दूसरे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधि दीपक सिंह ने ‘उत्तम प्रणाम’ और ‘उत्तम सुपरराइजा’ उत्पादों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ये दोनों जैव-उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं. साथ ही इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बनी रहती है. ये उत्पाद रसायन-मुक्त हैं और खेत की सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाते. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि चंबल फर्टिलाइजर की ओर से मिट्टी की जांच फ्री कराई जाती है. अतः किसान अपनी मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं, क्योंकि आज के समय में मिट्टी की जांच अत्यंत आवश्यक है.

किसान सम्मान निधि के लिए फार्मर रजिस्ट्रेशन जरूरी

तीसरे चरण में कृषि विभाग के एडीओ बिसवां, सीतापुर के रविंद्र कुमार ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती को लेकर सरकार की ओर से योजनाएं चलाई जा रही हैं. साथ ही क्लस्टर के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है और खेती भी कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि यदि किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि प्राप्त करनी है तो वे अपना रजिस्ट्रेशन अवश्य करवा लें. यदि रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि नहीं मिलेगी.

नैनो यूरिया से कम लागत में अधिक उत्पादन

चौथे चरण में इफको के डीजीएम एस.सी. मिश्रा ने बताया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग से फसलों को लगभग 80–90 प्रतिशत तक पोषक तत्वों की उपलब्धता का लाभ मिलता है, जबकि परंपरागत दानेदार उर्वरकों से लाभ अपेक्षाकृत कम मिलता है. उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि किसान नैनो उर्वरकों का उपयोग कर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करें. उन्होंने किसानों से अपील की कि खेतों में उर्वरकों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार ही करें. एक-दूसरे की देखा-देखी अधिक उर्वरक का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे मिट्टी की ताकत लगातार कम होती जा रही है.

खेती में विविधीकरण पर जोर

पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले एक दशक से सीतापुर जिले में खेती में विविधीकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है. खस, औषधीय फसलों, सब्जी और फल उत्पादन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किसान खेती कर रहे हैं. साथ ही बकरी पालन, भेड़ पालन, मुर्गी पालन और गाय पालन में भी जिले के किसान अच्छा काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब जिले के किसान केवल गन्ना की खेती पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग फसलों की खेती कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़कर खेती में नवाचार पर विचार करना चाहिए. साथ ही दलहन और तिलहन की खेती में भी कदम बढ़ाने की आवश्यकता है और इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र किसानों के साथ खड़ा है.

पशुपालन योजनाओं की जानकारी

छठे चरण में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशाराम ने मुर्गी पालन और बकरी पालन पर जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मुर्गी पालन पर सरकार द्वारा 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रहा है. इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रशिक्षण लेना आवश्यक है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि डेयरी क्षेत्र को लेकर भी सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. यदि कोई किसान इसका लाभ लेना चाहता है तो संबंधित विभाग से संपर्क कर सकता है.

कला के जरिए खेती का संदेश

सातवें चरण में मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. साथ ही उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया.

उत्पादक बनने की है जरूरत, उपभोक्ता नहीं

आठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दया एस. श्रीवास्तव ने कहा कि किसानों को उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक बनने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि यदि किसानों को आत्मनिर्भर बनना है तो बीज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा, क्योंकि आज अधिकांश किसान बीजों के लिए बाजार पर निर्भर हैं. यदि किसी किसान के पास कोई यूनिक बीज है तो वह कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें और उस बीज को वहां जमा करें. इससे किसान अपने बीज का मूल्य स्वयं निर्धारित कर सकेंगे.

भारत सरकार की एक प्रणाली के तहत बीजों के मालिकाना हक दिलाने की व्यवस्था है, जिसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करना होगा. यदि किसी किसान ने  प्राकृतिक या पुरानी किस्म के बीज का संरक्षण किया है, तो वह केवीके से अवश्य मिले. उन्होंने कहा कि यदि आने वाले समय में बीज संरक्षण नहीं किया गया तो बीज महंगे हो जाएंगे और छोटे किसानों के लिए उन्हें खरीदना कठिन हो जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि सीतापुर में अब सफेद हल्दी की खेती हो रही है और किसानों को इस दिशा में भी कदम बढ़ाने चाहिए.

प्राकृतिक खेती पर जोर

नौवें चरण में जिला कृषि रक्षा अधिकारी शिव शंकर कुमार ने कहा कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना आवश्यक है. खेतों में ढैंचा की फसल अवश्य लगाएं, इससे मिट्टी की ताकत में काफी वृद्धि होती है. उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग किसानों के लिए सदैव तत्पर हैं साथ ही बीजों पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रावधान भी किया गया है. किसानों को इसका लाभ अवश्य लेना चाहिए.

लकी ड्रॉ और वृक्षारोपण

अंतिम और दसवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और पांच किसानों को 1000 रुपये का पुरस्कार दिया गया. यह पुरस्कार सुशीला, सोनी, सगीर अहमद, रोहित और रमेश कुमार को दिया गया. इसके साथ ही वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों द्वारा पौधरोपण किया गया. साथ ही उर्वरकों के सही उपयोग को लेकर एक प्रायोगिक प्रदर्शन भी किया गया. ‘किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.

किसान कारवां पहल का मकसद

किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.

हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.

2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.

3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.

4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.

5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.

6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.

7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.

8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल  https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर

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