गौतम बुध नगर पहुंचा किसान कारवांकिसान तक का किसान कारवां आज गौतम बुद्ध नगर के बमबार्ड गांव में पहुंचा, जो 75 जिलों की इस विशेष कवरेज का 75वां और अंतिम पड़ाव रहा. इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने उत्साह के साथ भाग लिया. कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी. साथ ही उन्होंने किसानों को यह भी बताया कि आधुनिक तरीकों को अपनाकर किस तरह खेती से आमदनी बढ़ाई जा सकती है. वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती की नई तकनीकों, उन्नत बीजों और बेहतर उत्पादन के तरीकों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने किसानों को समय के साथ बदलती खेती की जरूरतों को समझने और नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया.
इस कार्यक्रम में किसानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली. किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं साझा कीं और उनके समाधान भी प्राप्त किए. कुल मिलाकर किसान कारवां का यह अंतिम पड़ाव किसानों के लिए ज्ञानवर्धक और लाभकारी साबित हुआ, जिससे उन्हें खेती में नए प्रयोग करने और अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में प्रेरणा मिली.
पहले चरण में किसान कारवां के पहले चरण में कृषि विभाग के सहायक विकास अधिकारी दुष्यंत भारद्वाज ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है. उन्होंने कहा कि किसानों को मिनी किट के माध्यम से बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, खरीफ सीजन के लिए उन्नत बीज दिए जा रहे हैं और कृषि यंत्रीकरण योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है. इसके साथ ही उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य बताते हुए कहा कि भविष्य में केवल पंजीकृत किसानों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा.
दूसरे चरण में प्रगतिशील किसान ओमवीर ने बताया कि उन्हें सरकार की नंद बाबा योजना का लाभ मिला, जिसके तहत उन्होंने देसी गायों का पालन शुरू किया. उन्होंने कहा कि इससे उन्हें जैविक खेती अपनाने में मदद मिली और आज वे बासमती धान की खेती के साथ यंत्रीकरण का पूरा लाभ ले रहे हैं. ओमवीर ने कहा कि जैविक खेती से मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है और किसान की आय भी बढ़ती है.
तीसरे चरण में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार ने पशुपालन से जुड़ी योजनाओं जैसे नंद बाबा और नंदिनी योजना की जानकारी दी. उन्होंने किसानों को हरे चारे की विभिन्न किस्मों के बारे में बताया और कहा कि संतुलित चारा देने से दूध उत्पादन में वृद्धि होती है. साथ ही मिनरल मिक्सर के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे पशुओं में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती और उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है. देसी गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग खेती को भी लाभ पहुंचाता है.
चौथे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के मार्केटिंग मैनेजर आलोक चौधरी ने बताया कि बिना मिट्टी परीक्षण के खेती को लाभकारी बनाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी संस्था किसानों की मुफ्त मिट्टी जांच कराती है और उसी आधार पर उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग की सलाह देती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और उत्पादन बढ़ता है.
पांचवें चरण में प्रगतिशील किसान आलोक ने बताया कि जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और बेहतर क्वालिटी का अनाज प्राप्त होता है. उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ रही है, जिससे किसानों को अधिक मूल्य मिल रहा है और उनकी आमदनी में वृद्धि हो रही है.
छठे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र गौतम बुद्ध नगर के पशु वैज्ञानिक कुंवर घनश्याम ने बताया कि किसानों को साहिवाल, गिर और अन्य उन्नत नस्ल की गायों का पालन करना चाहिए. उन्होंने भैंस की मुर्रा नस्ल को सबसे बेहतर बताते हुए कहा कि इससे अधिक दूध उत्पादन होता है. इसके अलावा नीली रवि नस्ल की भैंस भी दूध उत्पादन के लिए अच्छी मानी जाती है.
सातवें चरण में उद्यान वैज्ञानिक डॉ. सुनील प्रजापति ने बताया कि दिल्ली के नजदीक होने के कारण गौतम बुद्ध नगर में बागवानी की अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने किसानों की समस्याओं का समाधान करते हुए बताया कि फल गिरने और नींबू झड़ने का मुख्य कारण कॉपर और बोरान की कमी है. उन्होंने किसानों को इन सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति करने की सलाह दी.
आठवें चरण में किसान सुमित ने कहा कि आज खेती को वैज्ञानिक तरीके से करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि जैविक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादों का अच्छा मूल्य बाजार में मिलता है, विशेषकर दिल्ली जैसे बड़े बाजार में.
नौवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि सरकार संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर अभियान चला रही है. उन्होंने कहा कि अधिक उर्वरक के उपयोग से उत्पादन नहीं बढ़ता बल्कि मिट्टी का स्वास्थ्य खराब होता है. साथ ही उन्होंने किसानों को बासमती धान की सीधी बुवाई अपनाने और निर्यात के अवसरों का लाभ उठाने की सलाह दी.
दसवें चरण में अपर जिला कृषि अधिकारी अंबा प्रकाश शर्मा ने बताया कि कृषि विभाग की कई योजनाएं किसानों के लिए चल रही हैं, जिनमें पीएम कुसुम योजना प्रमुख है. उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन के लिए उड़द, मूंग और ढैचा के बीज की बुकिंग शुरू हो चुकी है और जल्द ही पूसा की उन्नत बासमती किस्म उपलब्ध होगी.
ग्यारहवें चरण में मृदा वैज्ञानिक डॉ. मोहन सिंह ने बताया कि मिट्टी के स्वस्थ रहने के लिए 17 आवश्यक तत्व जरूरी होते हैं, लेकिन किसान अक्सर केवल 3-4 तत्वों पर ही ध्यान देते हैं. उन्होंने सूक्ष्म पोषक तत्वों की नियमित पूर्ति करने पर जोर दिया ताकि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकें.
बारहवें चरण में जादूगर सलमान ने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि देखा-देखी खेती से बचना चाहिए और वैज्ञानिक तरीके अपनाने चाहिए. उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग और सरकारी योजनाओं से जुड़े रहने की सलाह दी.
तेरहवें चरण में कार्यक्रम के अंतिम चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 किसानों को 500 रुपये के इनाम दिए गए. पहला इनाम सरिता देवी और दूसरा इनाम संत राम को मिला, जिससे कार्यक्रम में उत्साह का माहौल देखने को मिला.
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