अमेठी में किसान कारवांउत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे किसान तक के 'किसान कारवां' ने गुरुवार को अमेठी जिले के अशरफपुर गांव में अपना 27वां पड़ाव पार किया. इस दौरान जिले के किसानों ने बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लिया और इस अवसर पर उन्हें खेती से जुड़ी नई जानकारी दी गई. किसान कारवां कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि, पशुपालन, बागवानी, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती सहित कई अहम पहलुओं पर कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र अमेठी के वैज्ञानिकों और अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई. वहीं, किसानों को उन्नत बीजों के चयन, फसल संरक्षण, बकरी और मुर्गी पालन की आधुनिक तकनीकों के साथ सरकारी योजनाओं के बारे में बताया गया, ताकि वे इन योजनाओं का लाभ उठा सकें और अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना सकें.
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से शुरू हुआ किसान तक का किसान कारवां कार्यक्रम जब अमेठी जिले में पहुंचा तो लोगों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला. इस कार्यक्रम के दौरान IFFCO एमसी और इफको द्वारा उर्वरकों के सही उपयोग पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई, जिससे किसानों को उर्वरकों का बेहतर तरीके से उपयोग करने की दिशा में मदद मिली. वहीं, स्थानीय लोगों का कहना था कि इस तरह का कार्यक्रम उनके गांव या आसपास के क्षेत्र में पहले कभी नहीं हुआ था. उन्हें न सिर्फ खेती के नए तरीकों के बारे में जानकारी मिली, बल्कि उन्हें यह भी समझ में आया कि कैसे कृषि को आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाया जा सकता है. कार्यक्रम के अंतर्गत लकी ड्रा द्वारा नकद राशि का वितरण और जादूगर सलमान के द्वारा कृषि के संदेशों के साथ जादू दिखाए गए, जिससे किसान और उनके परिवार के सदस्य भी खुश दिखाई दिए.
पहले चरण में पशु चिकित्सा अधिकारी राज नारायण ने किसानों को गौ पालन से जुड़ी राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही नंद बाबा दुग्ध मिशन योजना के तहत मिलने वाली नंदिनी कृषक समृद्धि योजना, मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना और मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने कुक्कुट पालन और कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित चलाई जा रही योजनाओं के बारे में भी किसानों को बताया.
दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र अमेठी की वैज्ञानिक डॉ. रेनू सिंह ने किसानों को बताया कि कृषि में बेहतर कार्य करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कृषि विज्ञान केंद्र की कितनी बड़ी भूमिका है. इस विषय पर उन्होंने विस्तार से जानकारी दी. साथ ही महिलाओं को पोषण वाटिका करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि पोषण वाटिका इसलिए जरूरी है क्योंकि आज बाजार में जहरीली सब्जियां उपलब्ध हैं. इससे बचने के लिए पोषण वाटिका के जरिए सब्जियों का उत्पादन करना चाहिए.
तीसरे चरण में IFFCO एमसी के प्रतिनिधि देवेंद्र यादव ने अपने 70 से अधिक रसायन-संबंधित उत्पादों के बारे में किसानों को जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह सभी उत्पाद खेती के नजरिए से काफी फायदेमंद और नुकसान देय नहीं है.
चौथे चरण में उप कृषि निदेशक, अमेठी, सतेंद्र कुमार ने जायद और खरीफ सीजन में किसानों को मिलने वाली बीजों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार द्वारा किसानों को क्वालिटी वाले बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में हुए बदलाव और किन किसानों को इसका लाभ मिलेगा, इस बारे में किसानों को जानकारी दी.
पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र अमेठी के पशु वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि आज पशुपालन के जरिए बेरोजगारी की समस्या को कम किया जा सकता है. इसके साथ ही किसान यदि अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें खेती के साथ पशुपालन से जुड़ना होगा. उन्होंने पशुओं के लिए पूरे साल हरा चारा उपलब्ध कराने पर जानकारी देते हुए कहा कि हरा चारा खिलाने से दूध उत्पादन बढ़ता है और पशुओं का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है. उन्होंने यह भी बताया कि किसानों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है.
छठवें चरण में IFFCO के प्रतिनिधि सौरभ चतुर्वेदी ने नैनो यूरिया सहित नैनो डीएपी के बारे में जानकारी दी. उन्होंने नैनो डीएपी के सही उपयोग पर जानकारी देते हुए कहा कि IFFCO के उत्पादों पर बीमा की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है. नैनो यूरिया और नैनो डीएपी पर संकट हरण बीमा योजना के तहत दस हजार रुपये का बीमा किया जाता है.
सातवें चरण में अमेठी जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ गोपाल कृष्ण शुक्ला ने पशुओं में टैगिंग लगाने को लेकर किसानों को जागरूक किया. उन्होंने कहा कि जिस तरह इंसानों के लिए आधार कार्ड जरूरी है, वैसे ही पशुओं के लिए टैगिंग जरूरी है. इसी के जरिए पशुओं की पहचान हो पाती है और इसी टैगिंग के माध्यम से किसानों को पशुपालन से जुड़ी कई योजनाओं का लाभ मिलता है. साथ ही उन्होंने पशुओं के टीकाकरण के प्रति भी जागरूक किया और बताया कि टीकाकरण अभियान विभाग की ओर से चलाया जा रहा है, कृपया इससे जुड़ें. उन्होंने कहा कि पशु टैगिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसी आपदा के दौरान यदि पशुओं की मृत्यु होती है, तो किसानों को सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है.
आठवें चरण में मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती और पशुपालन से जुड़ी जानकारी किसानों तक पहुंचाई. साथ ही उन्होंने गोबर खाद और पशुपालन करने का सुझाव दिया.
अंत में नौवें चरण में लकी ड्रॉ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये दिए गए. द्वितीय पुरस्कार 2000 रुपये रेनू को मिला, जबकि प्रथम पुरस्कार 3000 रुपये किसान यशोदा को दिया गया. अमेठी जिले में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि किसानों को नई उम्मीद और उत्साह भी दिया. इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि जब किसानों को सही जानकारी और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे अपनी खेती को बेहतर बना सकते हैं और अपने जीवन को बदल सकते हैं. अमेठी जिले में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.
हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर
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