DSR धान के लिए प्रोत्साहन राशि पाने में फर्जीवाड़े का खुलासा, रकम पाने के लिए आए 69 फीसदी क्लेम फर्जी 

DSR धान के लिए प्रोत्साहन राशि पाने में फर्जीवाड़े का खुलासा, रकम पाने के लिए आए 69 फीसदी क्लेम फर्जी 

हरियाणा सरकार किसानों को रोपाई विधि से धान की बुवाई करने की बजाय सीधी बुवाई के लिए प्रेरित कर रही है. क्योंकि, इससे पानी कम लगता है और लागत घटने के साथ ही समय भी कम लगता है. सीधी बुवाई से पर्यावरण को भी फायदा पहुंचता है. इसके लिए किसानों को 4000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है.

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DSR धान के लिए प्रोत्साहन राशि पाने में फर्जीवाड़े का खुलासा, रकम पाने के लिए आए 69 फीसदी क्लेम फर्जी कहा गया है कि किसानों ने राशि पाने के लिए गलत तरीका अपनाया है.

हरियाणा सरकार ने पानी की कम खपत और अधिक उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) धान की सीधी बुवाई विधि से खेती करने की अपील की है. डीएसआर विधि से खेती करने वाले किसानों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है. अब वेरीफिकेशन में खुलासा हुआ है कि डीएसआर विधि की प्रोत्साहन राशि पाने के लिए आए दावों में 69 फीसदी फर्जी पाए गए हैं. कहा गया है कि किसानों ने राशि पाने के लिए गलत तरीका अपनाया है.

किसानों को प्रति एकड़ 4 हजार रुपये देती है सरकार 

हरियाणा सरकार किसानों को रोपाई विधि से धान की बुवाई करने की बजाय सीधी बुवाई के लिए प्रेरित कर रही है. क्योंकि, इससे पानी कम लगता है और लागत घटने के साथ ही समय भी कम लगता है. सीधी बुवाई से पर्यावरण को भी फायदा पहुंचता है. इसके लिए किसानों को 4000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. द ट्रिब्यून की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि योजना का लाभ पाने के लिए किसानों की ओर से आए दावों में 69 फीसदी अप्रमाणिक पाए गए हैं. 

किसानों ने 5 लाख एकड़ में डीएसआर से खेती करने का दावा किया 

रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के किसानों ने कृषि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर डीएसआर तकनीक से बोए गए कुल 5,06,814.73 एकड़ धान का रजिस्ट्रेशन कराया है. खरीफ 2024 में हरियाणा में कुल 30,20,000 एकड़ धान की खेती दर्ज की गई. हरियाणा कृषि विभाग ने राज्य में फिजिकल वेरीफिकेशन प्रक्रिया के दौरान किसानों की ओर से चावल की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक के तहत बोए गए लगभग 69 फीसदी क्षेत्रों के दावों को अप्रमाणिक पाया है.

1.56 लाख लाख एकड़ में ही सही निकला डीएसआर से खेती का दावा 

विभाग ने किसानों से प्रोत्साहन राशि का दावा करने के लिए अपने वेब पोर्टल पर डीएसआर तकनीक के तहत बोए गए क्षेत्र की डिटेल्स अपलोड करने को कहा था. लगभग 30 लाख एकड़ धान क्षेत्र में से लगभग 17 फीसदी यानी 5,06,814.73 एकड़ में डीएसआर विधि से बुवाई का दावा किया गया. विभाग की ओर से फिजिकल वेरीफिकेशन में पाया गया कि 5,06,814.73 एकड़ क्षेत्र में से केवल 31 फीसदी यानी 1,56,891.37 एकड़ ने ही असल में डीएसआर विधि को अपनाया था. 

क्या है धान के लिए डीएसआर विधि और इसके फायदे 

हरियाणा सरकार ने धान उगाने वाले जिलों में 2021 में डीएसआर विधि को अपनाने की पहल शुरू की थी. क्योंकि इस तरह धान की खेती करने से लगभग 20 फीसदी कम पानी की जरूरत होती है. क्योंकि, पारंपरिक तरीके से धान की बुवाई के लिए पानी भरे खेत में पौधों की रोपाई की जाती है, जबकि डीएसआर विधि अपनाने पर धान का बीज छिडकाया जाता है. इससे फसल में सिंचाई लागत घट जाती है.  

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