सीएम ने लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर की राशिछत्तीसगढ़ में भूमिहीन कृषि मजदूरों को आर्थिक संबल देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को बलौदाबाजार में आयोजित कार्यक्रम में दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत 4 लाख 95 हजार 965 मजदूरों के खातों में 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये (लगभग 496 करोड़ा रुपये) की राशि सीधे ट्रांसफर की. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं बल्कि श्रमिकों के सम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल है.
उन्होंने बताया कि योजना के तहत हर साल भूमिहीन कृषि मजदूरों को 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे वे परिवार की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई और छोटे व्यवसायों में सहयोग ले सकें. उन्होंने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत किए गए वादों को तेजी और पारदर्शिता के साथ पूरा कर रही है. धान खरीदी में अंतर की राशि मिलने से किसानों ने संतोष के साथ होली मनाई, वहीं महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिली है.
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से घरों की चाबियां भी सौंपीं. उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 18 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे गरीब परिवारों को स्थायित्व मिला है. मुख्यमंत्री साय ने राज्य में 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, सिंचाई विस्तार के लिए 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक प्रावधान, तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि और अन्य योजनाओं का भी जिक्र किया.
उन्होंने कहा कि सरकार बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिलों के निपटान के लिए छूट और किस्तों की सुविधा भी दे रही है, जो जून तक जारी रहेगी. कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है और राशि सीधे खातों में पहुंचने से व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है. उन्होंने महतारी वंदन योजना और आवास योजना का भी उल्लेख किया. इस मौके पर तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल समेत अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे.
योजना की लाभार्थी बलौदाबाजार-भाटापारा के गांव संकरी की निवासी चमेली सेन ने कहा, "मेरे पास अपनी खेती की जमीन नहीं है और हम सिलाई व छोटे काम से घर चलाते हैं. बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल था. यह 10 हजार रुपये की मदद हमारे लिए बहुत बड़ी राहत है और इससे बच्चों की फीस भर पाएंगे."
वहीं, इसी गांव के धन्नूलाल धीवर ने कहा, "हम दोनों पति-पत्नी मजदूरी करके जीवन चलाते हैं. पहले जरूरत पड़ने पर काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब इस योजना से सहारा मिला है. एक साल के लिए चिंता कम हो गई है. मेरी पत्नी को महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है, जिससे घर चलाने में मदद मिलती है. यह योजना हमारे जैसे भूमिहीन परिवारों के लिए बहुत बड़ी राहत है."
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