Maharashtra: देहरजी प्रोजेक्ट में किसान परिवारों को राहत, 25.43 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा तय

Maharashtra: देहरजी प्रोजेक्ट में किसान परिवारों को राहत, 25.43 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा तय

महाराष्ट्र सरकार ने पालघर जिले की देहरजी मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित आदिवासी जमीन मालिकों और किसानों के लिए 25.43 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे को मंजूरी दी है. परियोजना पूरी होने पर वसई-विरार और मुंबई महानगर क्षेत्र के 15 लाख से अधिक लोगों को हर दिन 255 एमएलडी पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा.

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देहरजी प्रोजेक्ट में किसान परिवारों को राहत, 25.43 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा तयदेहरजी प्रोजेक्ट में किसानों को राहत

महाराष्ट्र सरकार ने पालघर जिले के विक्रमगढ़ तालुका में निर्माणाधीन देहरजी मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित आदिवासी जमीन मालिकों और किसानों को बड़ी राहत देते हुए 25.43 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे को मंजूरी दे दी है. इस फैसले से परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.

अधिकारियों के अनुसार, देहरजी परियोजना का निर्माण कार्य 11 नवंबर 2022 को शुरू हुआ था और अब तक इसका करीब 85 प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है. परियोजना को 95.60 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा करने की क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है.

15 लाख से अधिक लोगों को फायदा

परियोजना पूरी तरह चालू होने के बाद इसका सबसे बड़ा लाभ मुंबई महानगर क्षेत्र को मिलेगा. सरकार के अनुसार, यह जलाशय वसई-विरार नगर निगम और आसपास के इलाकों में रहने वाले 15 लाख से अधिक लोगों को हर दिन 255 मिलियन लीटर (एमएलडी) पीने का पानी उपलब्ध कराएगा.

हालांकि, परियोजना को स्थानीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ा था. प्रभावित ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों का कहना था कि भूमि अधिग्रहण के लिए निर्धारित सामान्य ‘रेडी रेकनर’ दरें उनकी जमीन की वास्तविक कीमत को नहीं दर्शाती हैं. इसी कारण मुआवजे को लेकर लंबे समय तक नाराजगी बनी रही.

बाद में जिला प्रशासन ने इस मुद्दे को राज्य सरकार के सामने उठाया, जिसके बाद मुआवजा राशि पर विचार करने की प्रक्रिया शुरू की गई. सरकार ने प्रभावित किसानों और भूमि मालिकों की मांगों पर विचार करते हुए बढ़ी हुई दरों को मंजूरी दी.

विस्थापित परिवारों फिर से बसाने की योजना  

पालघर की कलेक्टर इंदु रानी जाखड़ ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जमीन का दाम लगाने की प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और आदिवासी समुदायों के प्रति संवेदनशील बनाना था. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय महत्व की इस परियोजना के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ने वाले परिवारों के हितों की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिकता रही है.

सरकार की मंजूरी के बाद अब प्रभावित परिवारों को 25,43,100 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाएगा. इसके साथ ही विस्थापित परिवारों फिर से बसाने की योजना भी तैयार की गई है.

आधिकारिक बयान के अनुसार, परियोजना से प्रभावित सभी परिवारों का पुनर्वास अगले 18 महीनों के दौरान चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा. जिला प्रशासन को उम्मीद है कि बढ़े हुए मुआवजे और पुनर्वास योजना के बाद बाकी बची जमीन ट्रांसफर करने की प्रक्रिया तेजी से पूरी होगी, जिससे परियोजना को समय पर पूरा करने का रास्ता साफ हो सकेगा.

देहरजी परियोजना को महाराष्ट्र में पानी की सप्लाई के ढांचे को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में माना जा रहा है, जो भविष्य में तेजी से बढ़ती आबादी की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी.(PTI)

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