
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की महिला उद्यमी ज्योति ठाकुर ने कृषि उपज के मूल्यवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण को आय का नया जरिया बनाकर महिला उद्यमिता की मिसाल पेश की हैकृषक परिवार से जुड़ी ज्योति ठाकुर ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) का लाभ लेकर ‘जेके फूड’ नाम से खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू की. यहां केले और आलू से चिप्स तैयार किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए अब उन्होंने नमकीन बनाने का काम भी शुरू कर दिया है.
ज्योति ठाकुर का परिवार लंबे समय से कृषि कार्य से जुड़ा हुआ है. उनकी स्वयं की भूमि पर केले का उत्पादन होता है, लेकिन कई बार बाजार में कृषि उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था.ऐसे में ज्योति ठाकुर और उनके पति ने कृषि उपज को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण कर मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की योजना बनाई.
बाजार की मांग को समझने के बाद उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया.उनका उद्देश्य अपनी कृषि उपज का बेहतर उपयोग करने के साथ-साथ आय का एक अतिरिक्त और स्थायी माध्यम तैयार करना था.
इकाई स्थापित करने के लिए ज्योति ठाकुर ने उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से संपर्क किया. विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने PMFME योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू की.मशीनरी और आवश्यक कच्चे माल की व्यवस्था के लिए उन्हें 9.55 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। योजना के तहत उन्हें 3.34 लाख रुपये की अनुदान राशि भी मिली.विभाग की ओर से उन्हें इकाई की स्थापना, मशीनरी के उपयोग और व्यवसाय संचालन को लेकर आवश्यक तकनीकी एवं व्यावसायिक मार्गदर्शन भी दिया गया.
‘जेके फूड’ में फिलहाल केले और आलू के चिप्स तैयार किए जा रहे हैं. स्थानीय बाजार में इन उत्पादों को अच्छा प्रतिसाद मिलने के बाद ज्योति ठाकुर ने कारोबार का विस्तार शुरू किया है. उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ अब वे अन्य किसानों से भी केले और आलू खरीद रही हैं.इससे उन्हें अपने व्यवसाय के लिए कच्चा माल मिल रहा है, वहीं आसपास के किसानों को भी अपनी कृषि उपज बेचने के लिए स्थानीय बाजार उपलब्ध हो रहा है.
व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए ज्योति ठाकुर ने अब नमकीन का उत्पादन भी शुरू किया है. इससे ‘जेके फूड’ के उत्पादों की संख्या बढ़ी है और ग्राहकों को खाद्य उत्पादों के अधिक विकल्प मिल रहे हैं.
उत्पादन बढ़ने के साथ इकाई में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं. इस तरह यह कारोबार केवल एक परिवार की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय किसानों और श्रमिकों को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ रहा है.
ज्योति ठाकुर का उद्यम यह दिखाता है कि कृषि उपज का प्रसंस्करण कर किसान परिवार अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं. खेत में पैदा होने वाले केले और आलू को सीधे बेचने के बजाय उनसे चिप्स और अन्य खाद्य उत्पाद तैयार करने से कृषि उपज को मूल्यवर्धित उत्पाद में बदला जा रहा है.
PMFME योजना से मिली आर्थिक सहायता, विभागीय मार्गदर्शन और स्वयं की मेहनत के दम पर ज्योति ठाकुर ने छोटे स्तर से शुरू किए गए प्रयास को खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय का रूप दिया है।.आज उनका ‘जेके फूड’ कारोबार उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ दूसरे किसानों को बाजार और स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम भी बन रहा है.
ज्योति ठाकुर ने योजना से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया.उनका कहना है कि PMFME योजना ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास दिया.
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