
मध्यप्रदेश सरकार ने किसान वर्ष में सोयाबीन किसानों के लिए बड़ी सौगात दी है. मंत्रि-परिषद ने सीहोर जिले की इछावर तहसील के ग्राम भाऊखेड़ी में नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए 20 हेक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इस फैसले से प्रदेश में सोयाबीन अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास और किसानों तक उन्नत कृषि विधि की पहुंच को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारत सरकार के अंतर्गत संचालित होगा.संस्थान सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में काम करते हुए देश के करीब 50 लाख सोयाबीन किसानों के हितों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है.
सरकार के अनुसार, ग्राम भाऊखेड़ी में आवंटित की गई 20 हेक्टेयर भूमि का उपयोग विशुद्ध रूप से कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए किया जाएगा.केंद्र के माध्यम से किसानों को सोयाबीन की उन्नत खेती, नवीन कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी जानकारी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सकेगा.
मध्यप्रदेश देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में शामिल है. ऐसे में प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर के सोयाबीन अनुसंधान एवं कृषि विस्तार से जुड़े संस्थान की स्थापना को किसानों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे सोयाबीन की खेती में अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी.
मंत्रि-परिषद ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के निरंतर संचालन के लिए भी बड़ा वित्तीय निर्णय लिया है. विश्वविद्यालय को ब्लॉक ग्रांट योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए 795 करोड़ 59 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है.यह राशि विश्वविद्यालय में वेतन, भत्ते, मानदेय, पेंशन तथा अन्य आवश्यक प्रशासनिक और आकस्मिक खर्चों की पूर्ति के लिए उपलब्ध कराई जाएगी.
वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अधीन 11 महाविद्यालय और 8 अनुसंधान केंद्र संचालित हैं. इनके माध्यम से कृषि शिक्षा, अनुसंधान और कृषि विस्तार से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं.विश्वविद्यालय में कार्यरत अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के साथ करीब 500 पुराने पेंशनरों के वेतन, भत्ते, मानदेय और पेंशन संबंधी वित्तीय दायित्व भी राज्य शासन द्वारा ब्लॉक ग्रांट के माध्यम से पूरे किए जाते हैं.
सरकार के इन दोनों फैसलों को मध्यप्रदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसान हितों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. एक ओर जहां सीहोर में सोयाबीन अनुसंधान और कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना से सोयाबीन किसानों को नई तकनीक और विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है, वहीं जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के लिए पांच वर्ष की वित्तीय स्वीकृति से कृषि शिक्षा और अनुसंधान गतिविधियों को निरंतरता मिलेगी.
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