
सूर्योदय योजना से किसानों को मिली राहतगुजरात सरकार की महत्वाकांक्षी किसान सूर्योदय योजना अब किसानों के लिए सही अर्थों में एक वरदान साबित हो रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को सिंचाई के लिए रात के बजाय दिन के दौरान बिजली की सप्लाई देना है. कच्छ के कुकमा गांव के किसान अरविंदभाई आहीर ने इस योजना को लेकर अपने सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं. वे बताते हैं कि पहले रात में बिजली मिलने के कारण किसानों को खेतों में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जंगली जीवों का भारी डर बना रहता था. लेकिन सूर्योदय योजना ने रात के रतजगे से मुक्ति दिला दी है. मुक्ति मिलने के कारण अब किसान दिन के समय बिना किसी डर के शांति से अपनी खेती का काम कर सकते हैं.
अरविंद भाई के अनुसार, अब दिन के दौरान 8 से 10 घंटे पर्याप्त बिजली मिलने से खेती का काम दोगुनी गति से हो रहा है. दिन के समय बिजली मिलने की इस उत्तम सुविधा के लिए सभी किसानों ने राज्य सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया है.
दिन में बिजली आपूर्ति मिलने से किसानों की मुश्किलें कम हुई हैं और खेती का काम आसान हुआ है. अरविंद ने बताया कि वह पिछले 15-20 वर्षों से खेती से जुड़े हुए हैं. पहले उन्हें रात के समय बिजली मिलती थी, जिससे खेती करना बेहद कठिन हो जाता था. रात में खेतों में काम करने के दौरान जंगली जानवरों, सांप और बिच्छू जैसे खतरों का सामना करना पड़ता था. इसके अलावा रात में जागकर काम करने की वजह से दिन में काम की क्षमता भी प्रभावित होती थी.

उन्होंने कहा कि अब दिन में 8 से 10 घंटे बिजली मिलने से उनके काम में काफी सुधार हुआ है. दिन के समय काम करने से न केवल सुरक्षा बढ़ी है, बल्कि काम की गति भी तेज हुई है. अरविंद के मुताबिक, पहले के मुकाबले अब वे दिन में दोगुना काम कर पा रहे हैं, जिससे खेती की उत्पादकता भी बढ़ी है.
किसान ने कहा कि दिन में बिजली मिलने से उन्हें दिन-रात का संतुलन मिला है और वे ज्यादा आराम के साथ बेहतर तरीके से खेती कर पा रहे हैं. उन्होंने सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जितना आभार व्यक्त किया जाए, उतना कम है. उनके अनुसार, किसान उज्ज्वला योजना के तहत दिन में नियमित बिजली आपूर्ति से पूरे गांव के किसानों को लाभ मिल रहा है और यह कदम खेती को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है.(कौशिक कंठेचा का इनपुट)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today