राजस्थान में सूखे जैसे हालातराजस्थान के कई इलाकों में कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात बन रहे हैं. इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से तुरंत तैयारी शुरू करने की मांग की है. गहलोत ने कहा कि आने वाले महीनों में लोगों और पशुओं के लिए पीने का पानी, चारा और रोजगार बड़ी समस्या बन सकते हैं. ऐसे में सरकार को अभी से आपात योजना तैयार करनी चाहिए.
अशोक गहलोत ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश की स्थिति ठीक नहीं रही है. उन्होंने दावा किया कि जोधपुर, बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर के कई गांव सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे हैं. गहलोत के मुताबिक, जोधपुर के करीब 2,000 गांव, बाड़मेर के 2,460 गांव, बालोतरा के 1,216 गांव और जैसलमेर के 961 गांव प्रभावित हैं. इसके अलावा मारवाड़ और राजस्थान के कई दूसरे हिस्सों में भी कम बारिश का असर देखने को मिल रहा है.
गहलोत ने राज्य सरकार से कहा कि स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अभी से तैयारी शुरू करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सिर्फ लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए भी पीने के पानी की व्यवस्था करनी होगी. उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में चारे की कमी भी बड़ी समस्या बन सकती है. इसलिए सरकार को चारा डिपो, पानी की व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर टैंकरों की सुविधा पहले से तैयार रखनी चाहिए. गहलोत ने इसके लिए एक कंटीजेंसी प्लान यानी आपात योजना बनाने की मांग की है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान पहले भी कई बार सूखे का सामना कर चुका है. हालांकि, समय के साथ ट्यूबवेल, हैंडपंप और रोजगार गारंटी योजना जैसी व्यवस्थाओं से सूखे का असर कुछ कम हुआ है. गहलोत ने आरोप लगाया कि रोजगार गारंटी व्यवस्था में बदलाव के बाद लोगों को जरूरत के समय काम मिलने का भरोसा पहले जैसा नहीं रहा है. उन्होंने कहा कि अगर सूखे जैसे हालात बढ़ते हैं तो प्रभावित इलाकों में राहत के काम शुरू करना जरूरी होगा, ताकि लोगों को रोजगार मिल सके और उनके परिवार की आमदनी चलती रहे.
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को बाड़मेर में कम बारिश वाले इलाकों के लिए राहत की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि आपात पीने के पानी की व्यवस्था और टैंकरों से पानी पहुंचाने का काम 31 दिसंबर तक जारी रहेगा. इसके अलावा बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर और दूसरे प्रभावित इलाकों में चारा डिपो खोलने की भी घोषणा की गई थी. जिला कलेक्टरों को आपात राहत कार्यों के लिए 1 करोड़ रुपये तक के काम मंजूर करने का अधिकार दिया गया है.
अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री की घोषणाओं को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि घोषणा के तीन दिन बाद भी इससे जुड़े आदेश जिला कलेक्टर तक नहीं पहुंचे थे. गहलोत ने कहा कि सिर्फ घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि जमीन पर लोगों को राहत मिले. उन्होंने कहा कि अगर सरकार हालात से निपटना चाहती है तो पानी, चारा और रोजगार से जुड़े फैसलों को तेजी से लागू करना होगा.
गहलोत ने किसानों के कर्ज माफ करने की मांग भी उठाई. उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने करीब 14 हजार करोड़ रुपये के कृषि कर्ज माफ किए थे. उन्होंने सरकार से मौजूदा हालात को देखते हुए किसानों को राहत देने की मांग की. उन्होंने कहा कि कम बारिश का सबसे ज्यादा असर किसानों और पशुपालकों पर पड़ता है. ऐसे में किसानों को आर्थिक मदद देने के साथ उनकी फसल और पशुओं के लिए भी जरूरी इंतजाम किए जाने चाहिए.
गहलोत ने बताया कि कांग्रेस के नेता ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे. इस दौरान यह देखा जाएगा कि वहां राहत के काम शुरू हुए हैं या नहीं और लोगों को समय पर भुगतान मिल रहा है या नहीं. कांग्रेस नेता यह भी जांच करेंगे कि प्रभावित गांवों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और लोगों के लिए पीने का पानी उपलब्ध है या नहीं. गहलोत ने कहा कि राजस्थान में सूखे जैसे हालात को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और सरकार को समय रहते जरूरी कदम उठाने चाहिए. (PTI)
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