गन्ना किसानों और मिल मालिकों की फिर होगी बातचीत (फोटो/एएनआई)कर्नाटक में गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों और चीनी मिल मालिकों के बीच जारी विवाद फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है. बेलगावी में मंगलवार को किसानों, चीनी मिल संचालकों और महाराष्ट्र की शेतकरी संगठन के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही. बैठक में गन्ने के दाम को लेकर दोनों पक्षों ने अपनी मांगें रखीं, लेकिन किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके. अब इस मुद्दे पर गुरुवार को एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत होगी.
बैठक के बाद कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि किसानों और चीनी मिल मालिकों की मांगें अलग-अलग हैं. सरकार दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रही है.
उन्होंने बताया कि बातचीत अभी पूरी नहीं हुई है और गुरुवार को भी बैठक जारी रहेगी. मंत्री ने कहा कि अगली बैठक में विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने साफ किया कि फिलहाल गन्ने की कीमत को लेकर ही चर्चा हुई है और एसआईपी के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई.
कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन मुख्य रूप से गन्ने के उचित दाम और चीनी उद्योग से जुड़ी नीतियों में बदलाव की मांग को लेकर चल रहा है. कर्नाटक रायथा संघ हसिरू सेना के महासचिव प्रेम चौगाला ने किसानों की तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें राज्य सरकार से 1,000 रुपये प्रति टन अतिरिक्त सहायता, चीनी मिलों से 4,500 रुपये प्रति टन गन्ना मूल्य देने और तौल के दौरान गन्ने से काई या गंदगी के नाम पर होने वाली कथित कटौती रोकने की मांग शामिल है.
किसान संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार के सामने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो करने की मांग भी उठाई है. इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियों की ओर से कर्नाटक को 100 प्रतिशत एथेनॉल आवंटन देने की मांग की गई है.
किसानों का कहना है कि पिछले साल राज्य को केवल 30 से 40 प्रतिशत इथेनॉल आवंटन मिला था. इससे कई चीनी और इथेनॉल फैक्ट्रियों की क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया और मिलों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई. इसका असर किसानों को गन्ने का भुगतान करने की क्षमता पर भी पड़ा.
किसानों की एक अन्य मांग घरेलू और व्यावसायिक इस्तेमाल वाली चीनी के लिए अलग-अलग कीमत निर्धारित करने की है. किसान चाहते हैं कि व्यावसायिक चीनी का मूल्य घरेलू चीनी से अधिक रखा जाए, ताकि चीनी मिलों की आमदनी बढ़ सके और किसानों को भी गन्ने का बेहतर दाम मिल सके. किसानों का मानना है कि इन मांगों पर फैसला होने से चीनी उद्योग की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा.
गन्ने की कीमतों को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. 31 अक्टूबर को मांड्या में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के प्रस्तावित दौरे के दौरान किसानों ने काले झंडे दिखाकर विरोध जताया था. इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था.
वहीं, मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि मौजूदा स्थिति कब तक जारी रहेगी, यह कहना मुश्किल है. क्योंकि इस मामले में चीनी मिल मालिकों के संगठन और किसान यूनियनों के बीच बातचीत चल रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर गन्ने का एमएसपी नहीं बढ़ाया गया तो लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. (एएनआई)
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