वाधवन पोर्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शनमहाराष्ट्र के पालघर जिले में वाधवन बंदरगाह के विरोध में बहुत बड़ा विरोध प्रदर्शन चल रहा है. सोमवार को इस पूरे इलाके में विरोधी संघर्ष समिति और अलग-अलग संगठनों की अपील पर जिला कलेक्टर कार्यालय पर एक भव्य मोर्चा निकाला गया. इस मोर्चे में लगभग 15 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान जताया गया है. मोर्चे में महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिली.
वाधवन बंदरगाह और मुरबे बंदरगाह परियोजनाओं को रद्द करने की मांग को लेकर जिले के समुद्र तट पर रहने वाले मछुआरे समुदाय और आदिवासी भाइयों-बहनों ने बड़ी संख्या में इस आंदोलन में भाग लिया और अपना तेज विरोध दर्ज कराया.
आंदोलनकारियों का कहना है कि ये बंदरगाह परियोजनाएं विनाशकारी हैं, जिनके कारण उनकी आजीविका, पर्यावरण और पारंपरिक जीवनशैली पर गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा. इसलिए सरकार से इन विनाशकारी परियोजनाओं को तुरंत रद्द किए जाने की जोरदार मांग की गई. मोर्चे के दौरान प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई और जिला प्रशासन को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा.
बंदरगाह के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन कई साल से चल रहा है. पालघर के अलावा इस मोर्चे में दहाणू और ठाणे जिले के प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं. चार साल पहले मुंबई के आजाद मैदान में भी इन तीनों जिलों के मछुआरे, आदिवासी और ग्रामीणों ने बड़ा विरोध मोर्चा निकाला था. दरअसल, वाधवन का एक बंदरगाह दहाणू में बन रहा है जिसके खिलाफ पूरे इलाके के लोगों ने मोर्चा खोला हुआ है. विश्व मत्स्य दिवस के दिन अक्सर इन समुदायों के लोग बंदरगाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते आए हैं.
मछुआरों का आरोप है कि इस बंदरगार के बनने से मछुआरों की रोजी-रोटी पर बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा क्योंकि लाखों की संख्या में मछुआ समुदाय के लोग समुद्र से मछलियां पकड़ कर रोजगार चलाते हैं. बंदरगाह बनने के बाद यह पूरा इलाका उनके हाथ से निकल जाएगा. ग्रामीणों को इस बात की आशंका भी है कि बंदरगाह बनने से यहां के 40 गांवों के लोग पूरी तरह से विस्थापित हो जाएंगे.
पिछली बार के विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की और अपनी मांग रखी. शिंदे ने भरोसा दिलाया था कि वे संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे और प्रभावित लोगों की शंकाओं को दूर करने में मदद करेंगे. हालांकि इस साल फिर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया जिसमें मंगलवार को निकाले गए मोर्चे में लगभग 15000 लोग शामिल हुए.
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