Farmer Protest: वाधवन बंदरगाह के खिलाफ पालघर में उग्र आंदोलन, ठिय्या आंदोलन से प्रशासन संकट में

Farmer Protest: वाधवन बंदरगाह के खिलाफ पालघर में उग्र आंदोलन, ठिय्या आंदोलन से प्रशासन संकट में

महाराष्ट्र के पालघर में वाधवन बंदरगाह के विरोध में माकपा के नेतृत्व में किसानों और आदिवासियों का लॉन्ग मार्च कलेक्टर कार्यालय पहुंचा, ठिय्या आंदोलन से प्रशासनिक संकट और यातायात बाधित हुआ.

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वाधवन बंदरगाह के खिलाफ पालघर में उग्र आंदोलन, ठिय्या आंदोलन से प्रशासन संकट मेंपालघर में किसानों और मछुआरों का आंदोलन

महाराष्ट्र के पालघर में मछुआरे, आदिवासी और किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है. पालघर में प्रस्तावित वाधवन बंदरगाह के खिलाफ पिछले कई साल से आंदोलन चल रहा है जो हाल के दिनों में और तेज हुआ है. इस क्रम में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में आदिवासियों और किसानों की अलग-अलग लंबित मांगों को लेकर चारोटी से पिछले दो दिनों से निकाला गया पैदल लॉन्ग मार्च बुधवार शाम करीब सात बजे, लगभग 30 घंटे बाद पालघर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा. इस दौरान पुलिस का भारी बंदोबस्त तैनात किया गया था, लेकिन पुलिस प्रशासन ने लॉन्ग मार्च को जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर ही रोक दिया.

जिलाधिकारी कार्यालय में प्रवेश से रोके जाने पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के हजारों कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय के दोनों प्रवेश द्वारों पर ठिय्या आंदोलन शुरू कर दिया. इस आंदोलन के कारण कार्यालय में मौजूद जिलाधिकारी इंदू रानी जाखड़ के लिए बाहर निकलना संभव नहीं हो पाया, जिससे एक प्रशासनिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है.

जिलाधिकारी के गेट पर धरना

इस मार्च में शामिल किसानों और माकपा के हजारों कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के दोनों गेटों पर धरना आंदोलन शुरू कर दिया है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से सीधा चेतावनी दी गई है कि कल न तो कार्यालय के किसी भी कर्मचारी को बाहर जाने दिया जाएगा और न ही बाहर से किसी कर्मचारी को कार्यालय के भीतर प्रवेश करने दिया जाएगा. मांगें पूरी होने तक यह ठिय्या आंदोलन जारी रहेगा, ऐसा आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है.

इस आंदोलन का बड़ा असर बोईसर–पालघर मुख्य मार्ग की यातायात व्यवस्था पर पड़ा है और यह मार्ग पूरी तरह से यातायात के लिए बंद कर दिया गया है. जिला प्रशासन के अड़ियल रवैये के कारण हमें यह निर्णय लेना पड़ा, ऐसा इस मौके पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक विनोद निकोले और अखिल भारतीय किसान सभा के नेता अशोक ढवले ने कहा.

मार्च के कारण ट्रैफिक ठप

सोमवार को पूरे दिन निष्क्रिय रहे प्रशासन ने मंगलवार को मोर्चा निकालने वालों से संपर्क किया. विधायक विनोद निकोले ने जानकारी दी कि उन्हें फोन पर बताया गया है कि प्रांत अधिकारी आकर प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करेंगे. हालांकि विधायक विनोद निकोले ने साफ रुख अपनाते हुए कहा है कि जिला कलेक्टर या मंत्री के अलावा किसी अन्य से बातचीत नहीं की जाएगी. उन्होंने चेतावनी दी है कि यह लॉन्ग मार्च आगे भी जारी रहेगा.

इस लॉन्ग मार्च के कारण मंगलवार को मनोर–पालघर मार्ग को यातायात के लिए बंद कर दिया गया. जिला प्रशासन ने वाहन चालकों और यात्रियों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की.

लॉन्ग मार्च की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • वन पट्टे के तहत कब्जे में ली गई पूरी जमीन पति-पत्नी दोनों के नाम की जाए.
  • वर्कर्स इनाम, देवस्थान, गायरान, सरकारी रवि और तलघर जमीनें जोतने वालों के नाम पर की जाएं.
  • ग्रामीण और शहरी जनता पर बोझ डालने वाली स्मार्ट मीटर योजना को बंद किया जाए.
  • जरूरतमंद परिवारों को घरकुल योजना का लाभ दिया जाए और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए.
  • जल जीवन मिशन के तहत रुके हुए कार्यों को तुरंत पूरा किया जाए.
  • जिले के बांधों का पानी स्थानीय लोगों को पीने और खेती के लिए प्राथमिकता के आधार पर दिया जाए.
  • रोजगार गारंटी योजना के तहत 200 दिन का काम और 600 रुपये दैनिक मजदूरी दी जाए.
  • परियोजना प्रभावित किसानों और काश्तकारों को 2013 के कानून के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए.
  • प्रत्येक परिवार को 35 किलो राशन दिया जाए.
  • जिला परिषद स्कूलों को बंद करने की साजिश रद्द की जाए और जिला परिषद और आश्रम शालाओं में शिक्षकों के रिक्त पद तुरंत भरे जाएं.
  • शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जाए.
  • इन सभी मांगों को लेकर इस लॉन्ग मार्च का आयोजन किया गया है.(मोहम्मद हुसैन खान का इनपुट)
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