सरसों खरीद जल्दी शुरू करने की मांग (सांकेतिक तस्वीर)सरसों की फसल बाजार में पहुंचने के बावजूद सरकारी खरीद शुरू न होने को लेकर किसान महापंचायत ने सरकार पर तीखा हमला बोला है. किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा तब तक अर्थहीन है, जब तक उसकी खरीद की ठोस व्यवस्था न हो. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गेहूं की खरीद पहले शुरू कर रही है, जबकि सरसों की नई फसल फरवरी से ही बाजार में आने लगती है और उसकी खरीद हर साल टालमटोल का शिकार होती है.
किसान महापंचाय की ओर से जारी एक बयान में मुताबिक, रामपाल जाट ने मासलपुर कहा कि इस समय सरसों की नई फसल मंडियों में पहुंच रही है, लेकिन अब तक इसकी सरकारी खरीद की तारीख तक तय नहीं की गई है. इसके कारण किसानों को अपनी उपज घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि दूसरी ओर गेहूं की खरीद 15 मार्च से शुरू करने की घोषणा कर दी गई है, जबकि ज्यादातर इलाकों में अभी गेहूं की कटाई तक शुरू नहीं हुई है.
रामपाल जाट ने कहा कि सरसों खरीद को लेकर किसान पिछले पांच वर्षों से लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकार 1 फरवरी से खरीद शुरू करे, क्योंकि इसी समय नई फसल मंडियों में आना शुरू हो जाती है. इसके बावजूद हर साल खरीद में देरी होती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि बिना खरीद व्यवस्था के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करना “थोथा चना बाजे घणा” जैसी स्थिति है.
उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब किसानों को उस कीमत पर अपनी उपज बेचने की सुनिश्चित गारंटी मिले. इसके लिए एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाना जरूरी है. रामपाल जाट ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा गठित समिति के उपसमूह ने 21 अप्रैल 2023 को इस संबंध में अनुशंसा भी कर दी थी, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार वर्ष 1968 से न्यूनतम समर्थन मूल्य को गारंटीड मूल्य के रूप में घोषित करती रही है और संसद में भी कई बार किसानों को एमएसपी से कम दाम पर उपज बेचने के लिए मजबूर नहीं होने देने का आश्वासन दिया गया है. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है.
रामपाल जाट ने आरोप लगाया कि सरकार व्यापारिक समझौतों के तहत विदेशी बाजारों के लिए दरवाजे खोलने में अधिक सक्रिय दिखती है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए उतनी गंभीरता नहीं दिखाई देती.
उन्होंने कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग भी कई बार खरीद की गारंटी और किसान हित में आयात-निर्यात नीति बनाने की सिफारिश कर चुका है, लेकिन इन सिफारिशों को लागू नहीं किया गया. किसान महापंचायत ने मांग की है कि सरसों की खरीद तत्काल शुरू की जाए और एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देकर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए.
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