ओडिशा में बागवानी अधिकारियों पर डिप्टी CM सख्त, बोले- ‘काम करो या कार्रवाई के लिए तैयार रहो’

ओडिशा में बागवानी अधिकारियों पर डिप्टी CM सख्त, बोले- ‘काम करो या कार्रवाई के लिए तैयार रहो’

ओडिशा के उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव ने बागवानी अधिकारियों को काम में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है. 57 कोल्ड स्टोरेज में सिर्फ एक के पूरा होने पर उन्होंने नाराजगी जताई. सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक खेती, ऑयल पाम, हाई-वैल्यू फसलों, फूलों की खेती, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट और बेहतर बाजार व्यवस्था पर जोर दे रही है.

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ओडिशा में बागवानी अधिकारियों पर डिप्टी CM सख्त, बोले- ‘काम करो या कार्रवाई के लिए तैयार रहो’काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी

ओडिशा में बागवानी योजनाओं की धीमी रफ्तार को लेकर सरकार ने अधिकारियों पर सख्ती बढ़ा दी है. राज्य के उपमुख्यमंत्री और कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के मंत्री केवी सिंह देव ने गुरुवार को बागवानी अधिकारियों के कामकाज पर नाराजगी जताई. उन्होंने अधिकारियों को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर वे अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकारी पद सिर्फ बैठने के लिए नहीं हैं, बल्कि किसानों तक योजनाओं का फायदा पहुंचाने के लिए हैं.

57 कोल्ड स्टोरेज बनने थे, अभी सिर्फ एक तैयार

उपमुख्यमंत्री ने सबसे ज्यादा नाराजगी राज्य में कोल्ड स्टोरेज के निर्माण की धीमी गति को लेकर जताई. उन्होंने बताया कि सरकार ने राज्य में 57 कोल्ड स्टोरेज बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन अब तक सिर्फ एक कोल्ड स्टोरेज ही पूरा हो पाया है. उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि जब सरकार ने इतने बड़े स्तर पर योजना बनाई थी तो बाकी कोल्ड स्टोरेज कहां हैं और उनके निर्माण में इतनी देरी क्यों हो रही है.

उन्होंने कहा कि सरकार के पांच साल के कार्यकाल का लगभग आधा समय निकल चुका है. ऐसे में अगर योजनाएं इसी गति से चलती रहीं तो बाकी कोल्ड स्टोरेज कब पूरे होंगे? उन्होंने अधिकारियों को काम में तेजी लाने और योजनाओं को जमीन पर उतारने के निर्देश दिए.

दो साल में बागवानी विभाग का बजट दोगुने से ज्यादा हुआ

केवी सिंह देव ने यह भी कहा कि सरकार ने कृषि और बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बजट में काफी बढ़ोतरी की है. उन्होंने बताया कि विभाग का बजट 7,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यानी सरकार ने किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए खर्च करने के लिए पहले से कहीं ज्यादा पैसा उपलब्ध कराया है.

उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब सरकार इतना पैसा दे रही है तो योजनाओं का काम जमीन पर उसी हिसाब से क्यों नहीं दिखाई दे रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी बजट केवल खर्च करने के लिए नहीं है, बल्कि इसका फायदा किसानों तक पहुंचना चाहिए.

‘सरकारी नौकरी मनोरंजन के लिए नहीं है’

अधिकारियों को फटकार लगाते हुए सिंह देव ने कहा कि सरकारी पद पर बैठना कोई मनोरंजन का काम नहीं है. अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र में जाएं और देखें कि सरकार की योजनाओं का किसानों को सही फायदा मिल रहा है या नहीं.

उन्होंने कहा कि जब वह अलग-अलग जिलों का दौरा करते हैं तो कई बार कोई अधिकारी उनसे मिलने या उन्हें जमीनी स्थिति बताने तक नहीं आता. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उन्हें अपने दफ्तरों से बाहर निकलकर गांवों और खेतों तक जाना होगा. किसानों से सीधे बात करके उनकी समस्याओं को समझना होगा और उनका समाधान निकालना होगा.

सरकार से जानकारी छिपाने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी कि सरकार से विभाग की गतिविधियों और खर्च से जुड़ी जानकारी छिपाने को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने दौरे पर जाते हैं तो उन्हें यह बताना होगा कि वहां जाकर उन्होंने क्या देखा, किसानों के लिए क्या काम किया और उस दौरे से क्या फायदा हुआ.

उन्होंने दूसरे राज्यों और विदेशों में सरकारी दौरे पर जाने वाले अधिकारियों से भी रिपोर्ट मांगी. उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे सभी दौरों की रिपोर्ट और उससे मिली जानकारी सात दिन के अंदर विभाग को दी जाए.

हर महीने देनी होगी फील्ड विजिट की रिपोर्ट

उपमुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों, यहां तक कि विभाग के निदेशक को भी हर महीने अपनी फील्ड विजिट की रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया. इसका मकसद यह पता लगाना है कि अधिकारी वास्तव में खेतों और किसानों तक पहुंच रहे हैं या नहीं.

उन्होंने कहा कि केवल सरकारी कागजों में योजनाएं चलाना काफी नहीं है. अधिकारियों को मौके पर जाकर यह देखना होगा कि योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं. अगर किसी किसान को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है तो उसकी वजह पता करके उसे दूर करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है.

बागवानी से किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर

केवी सिंह देव ने कहा कि बागवानी किसानों की आय बढ़ाने का एक बड़ा माध्यम बन सकती है. फल, सब्जियां, फूल और दूसरी ज्यादा कमाई वाली फसलों की खेती से किसान पारंपरिक फसलों के मुकाबले बेहतर कमाई कर सकते हैं. इसके साथ ही बागवानी से लोगों को पौष्टिक भोजन भी मिल सकता है.

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे किसानों को सिर्फ सरकारी योजनाओं की जानकारी देने तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें यह भी बताएं कि कौन सी फसल उनके क्षेत्र और जमीन के लिए बेहतर रहेगी. किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर खेती के तरीकों की जानकारी देकर उनकी पैदावार और कमाई बढ़ाने पर काम किया जाना चाहिए.

खाने के तेल की कमी दूर करने के लिए ऑयल पाम की खेती

राज्य में खाद्य तेल की जरूरत को पूरा करने के लिए ऑयल पाम की खेती बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. भारत में खाद्य तेल की मांग काफी ज्यादा है और इसका एक बड़ा हिस्सा आयात करना पड़ता है. ऐसे में देश में तेल देने वाली फसलों और ऑयल पाम का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

ओडिशा में भी ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देकर किसानों को एक नई व्यावसायिक फसल से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. सरकार का उद्देश्य ऐसी फसलों को बढ़ावा देना है जिनसे किसानों को लंबे समय में बेहतर आमदनी मिल सके.

विदेशों में अच्छी कीमत दिलाने वाली फसलों पर फोकस

बैठक में ओडिशा की बागवानी फसलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया. इसके लिए फसलों की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादन के बाद सही तरीके से संभालने और बाजार की मांग के अनुसार खेती करने की जरूरत बताई गई.

सरकार ज्यादा कीमत वाली फसलों और व्यावसायिक फूलों की खेती को भी बढ़ावा देना चाहती है. इसका मकसद किसानों को उनकी जमीन से ज्यादा कमाई का मौका देना है. अगर किसानों की उपज अच्छी गुणवत्ता की होगी और उसे सही बाजार मिलेगा तो उनकी आमदनी बढ़ सकती है.

किसानों की उपज खेत से सीधे ग्राहक तक पहुंचाने की तैयारी

सम्मेलन में फसल कटाई के बाद की व्यवस्था यानी पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट पर भी चर्चा हुई. फल और सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली उपज के लिए यह बहुत जरूरी है. अगर फसल को सही तरीके से स्टोर और पैक नहीं किया जाए तो किसान को काफी नुकसान हो सकता है.

इसी वजह से कोल्ड स्टोरेज, बेहतर पैकेजिंग, आधुनिक तकनीक और बाजार की सुविधा पर ध्यान दिया जा रहा है. साथ ही किसानों को सीधे ग्राहकों तक अपनी उपज बेचने के बेहतर अवसर देने की बात भी कही गई. इससे बीच के बिचौलियों की भूमिका कम हो सकती है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है.

जलवायु के अनुकूल खेती को मिलेगा बढ़ावा

इस मौके पर Khety Agro Pvt Ltd और Directorate of Horticulture के बीच एक समझौता भी हुआ. इसका उद्देश्य जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है. बदलते मौसम के कारण किसानों को बारिश, गर्मी और दूसरी मौसम संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में ऐसी तकनीक और खेती के तरीके अपनाने की जरूरत है जिनसे मौसम में बदलाव का असर कम हो.

इस समझौते के जरिए आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने की बात कही गई है.

अब कागजों से निकलकर खेतों तक पहुंचानी होगी योजनाएं

ओडिशा सरकार की इस बैठक से साफ है कि अब बागवानी विभाग की योजनाओं की निगरानी और सख्त की जाएगी. सरकार का जोर सिर्फ बजट बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उस पैसे का सही इस्तेमाल करके किसानों तक फायदा पहुंचाने पर है.

कोल्ड स्टोरेज से लेकर आधुनिक खेती, ऑयल पाम, फूलों की खेती, निर्यात और सीधे बाजार तक पहुंच जैसी योजनाओं का मकसद किसानों की आमदनी बढ़ाना है. लेकिन इन योजनाओं का असली फायदा तभी मिलेगा जब अधिकारी नियमित रूप से खेतों में जाएंगे और किसानों की समस्याओं को समझेंगे. इसी वजह से उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया है कि काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और योजनाओं का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए.

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