ओडिशा विधानसभा में धान खरीदी को लेकर हंगामा (सांकेतिक तस्वीर)ओडिशा विधानसभा में शनिवार को लगातार चौथे दिन भी कामकाज ठप रहा. धान खरीद में कथित अव्यवस्थाओं और किसानों को पूरा दाम न मिलने के मुद्दे पर विपक्षी बीजद और कांग्रेस विधायकों ने जोरदार हंगामा किया. सदन के भीतर नारेबाजी, तख्तियां दिखाने और वेल में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन के चलते विधानसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी. सुबह 10.30 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी विधायक नारे लगाते हुए सीधे वेल में पहुंच गए. इससे पहले बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को भी विधानसभा में ऐसे ही हालात बने रहे थे.
विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में धान खरीद की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और किसानों को घोषित मूल्य तक नहीं मिल पा रहा है. विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने सदन में शांति बनाए रखने और सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील की, लेकिन उनकी अपील बेअसर रही. हंगामा थमते न देख उन्होंने पहले सदन की कार्यवाही 11.30 बजे तक के लिए स्थगित की. तय समय पर कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन हालात जस के तस बने रहे. इसके बाद अध्यक्ष ने सदन को शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया.
कांग्रेस विधायक इस दौरान काली पट्टियां बांधकर सदन में पहुंचे थे. विधायकों ने कहा कि राज्य संचालित मंडियों में किसानों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मंडियों में ‘कटनी-छटनी’ की अवैध प्रथा अब भी जारी है. इसके तहत प्रति क्विंटल धान में 7 से 8 किलो तक की कटौती कर ली जाती है, जिससे किसानों को सीधा नुकसान उठाना पड़ता है.
हालांकि, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सदन के पटल पर यह भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों से पूरा धान खरीदेगी, लेकिन विपक्ष इस आश्वासन से संतुष्ट नजर नहीं आया. बीजद और कांग्रेस विधायकों ने मांग की कि सरकार केवल बयान न दे, बल्कि ‘कटनी-छटनी’ को पूरी तरह रोकने की ठोस गारंटी दे.
विपक्ष की एक और अहम मांग धान का मूल्य 3,169 रुपये प्रति क्विंटल देने की है. इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ इनपुट सब्सिडी भी शामिल है. बीजद के उपनेता प्रतिपक्ष प्रसन्न आचार्य ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद से सरकार लगातार किसानों को आश्वासन दे रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. उन्होंने कहा कि न तो किसानों को पूरा दाम मिल रहा है और न ही भुगतान समय पर हो रहा है.
बरगढ़ जिले से आने वाले आचार्य ने यह भी कहा कि विपक्ष सदन को बाधित नहीं करना चाहता, लेकिन किसानों के मुद्दे पर सरकार चर्चा से भाग रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि जो घोषणाएं की जा रही हैं, वे मंडियों में लागू ही नहीं हो रहीं. उन्होंने सरकार से इस विषय पर सदन में चर्चा के लिए प्रस्ताव लाने की मांग की.
कांग्रेस विधायक दल के नेता रमा चंद्र कदम ने भी सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि किसान मजबूरी में धान औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं. चुनाव के समय भाजपा ने किसानों से बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें पूरा नहीं किया गया. उन्होंने इनपुट सब्सिडी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि घोषित 800 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय किसानों को कम राशि दी जा रही है.
बीजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व कृषि मंत्री अरुण कुमार साहू ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को गुमराह कर रही है और इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि किसान कमजोर होंगे तो पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी.
वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक सनातन बिजुली ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि बार-बार सदन की कार्यवाही बाधित करना किसान और महिलाओं के हितों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि विपक्ष मुद्दों पर चर्चा के बजाय केवल हंगामा कर रहा है. इस बीच, बीजद विधायकों ने खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण मंत्री के सी पात्रा के इस्तीफे की भी मांग उठा दी. (पीटीआई)
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