डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर (फोटो/एएनआई)कर्नाटक में सूखे के कारण कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ रहा है. राज्य के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कुछ इलाकों में फसल नुकसान 80 फीसदी तक पहुंचने की बात कही है. उन्होंने केंद्र सरकार से सूखा राहत के लिए राशि जारी करने की मांग करते हुए कहा कि किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए.
उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सूखे की वजह से राज्य के कुछ हिस्सों में करीब 80 फीसदी फसलें बर्बाद हो गई हैं. इसका असर आने वाले महीनों में खाद्यान्न उत्पादन और उपलब्धता पर भी पड़ सकता है. फिलहाल राज्य में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार है, लेकिन उत्पादन में गिरावट आने पर स्थिति का आकलन कर जरूरी कदम उठाने होंगे.
परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार ने किसानों को मुआवजा देने के लिए आदेश जारी कर दिए हैं. वित्त विभाग से भी मंजूरी मिल चुकी है और मुआवजा जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ रही है. राशि जारी होने के बाद इसे जिला उपायुक्तों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाएगा. उन्होंने वित्त विभाग को निर्देश दिया है कि मुआवजे के भुगतान में देरी न हो.
उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों के लिए 1,250 करोड़ रुपये की राहत घोषित की है. हालांकि, उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत केंद्र से राहत राशि नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया. परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है और केंद्र को भी अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए.
परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार केंद्र से मुलाकात के लिए समय मांग रही है, लेकिन अभी तक उसे समय नहीं मिला है. उन्होंने कर्नाटक के सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सूखा राहत के मुद्दे पर राज्य का साथ दें और केंद्र से आवश्यक राशि जारी कराने की मांग करें.
उप मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अगर सूखे के कारण अनाज उत्पादन उम्मीद से कम रहता है तो आने वाले महीनों में इसका असर दिखाई दे सकता है. उन्होंने कहा कि फिलहाल राज्य में अनाज का पर्याप्त भंडार है, लेकिन उत्पादन में कमी आने पर खाद्यान्न की उपलब्धता की समीक्षा करनी होगी और जरूरत के अनुसार कदम उठाने होंगे. (पीटीआई)
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