हरियाणा में धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने की मांग तेज (सांकेतिक तस्वीर)अंबाला कैंट की अनाज मंडी में रविवार को भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के बैनर तले किसानों ने धान खरीद के दौरान आ रही परेशानियों के विरोध में धरना दिया. किसानों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का पुतला फूंका. प्रदर्शनकारियों ने धान खरीद की तय सीमा बढ़ाकर 32 क्विंटल प्रति एकड़ करने की मांग की. भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के जिला अध्यक्ष गुरमीत सिंह माजरी ने कहा कि संगठन के आह्वान पर जिले की सभी अनाज मंडियों में विरोध प्रदर्शन किया गया.
उन्होंने कहा कि धान खरीद का सीजन शुरू होने के बावजूद बड़ी संख्या में किसानों का मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर सत्यापन लंबित है. वेरिफिकेशन के लिए किसानों को अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे वे समय पर अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं. उन्होंने संबंधित अधिकारियों से लंबित सत्यापन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की.
'दि ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरमीत सिंह माजरी ने कहा कि सरकार ने इस साल धान खरीद के लिए प्रति एकड़ 26.26 क्विंटल की सीमा तय की है, जिसे किसान संगठन स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने मांग की कि खरीद सीमा कम से कम 32 क्विंटल प्रति एकड़ की जाए. साथ ही किसानों की पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद एजेंसियों के माध्यम से खरीदी जाए.
माजरी ने कहा कि किसानों की मांगों पर कार्रवाई नहीं होने तक संगठन अनाज मंडियों में रोजाना धरना जारी रखेगा. उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सरकार और अधिकारियों को जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए.
भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के अध्यक्ष अमरजीत सिंह मोहड़ी ने कहा कि संगठन पहले भी धान खरीद की सीमा को लेकर सरकार के सामने अपनी मांग रख चुका है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि जब तक खरीद सीमा बढ़ाकर 32 क्विंटल प्रति एकड़ नहीं की जाती, किसानों का आंदोलन जारी रहेगा.
अमरजीत सिंह मोहड़ी ने कहा कि सरकार को मंडियों में पहुंचने वाली धान की फसल का समय पर उठान सुनिश्चित करना चाहिए. इसके साथ ही किसानों को उनकी उपज का भुगतान भी तय समय सीमा के भीतर किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किसानों की मांगों पर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो किसान संगठन बड़े आंदोलन का आह्वान करने के लिए मजबूर होंगे.
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