फरीदकोट में किसानों का विरोध प्रदर्शनपंजाब के फरीदकोट में विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के घर का घेराव कर बैठे किसानों को पुलिस ने हटा दिया. इसके साथ ही 200 से अधिक किसानों को हिरासत में लिया गया. किसानों की प्रमुख मांगों में कर्ज माफी, शंभू-खनौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा और लैंड मॉर्गेज बैंकों द्वारा किसानों से लिए गए खाली चेकों के कथित दुरुपयोग को रोकने सहित अन्य मांगें शामिल हैं.
फरीदकोट के गांव संधवां में विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के घर के सामने अपनी मांगों को लेकर 5 अगस्त से किसान धरना दे रहे थे. इन किसानों के पक्के मोर्चे को आज पुलिस ने जबरन हटवा दिया. किसानों ने रेलवे ट्रैक और हाईवे जाम करने की चेतावनी दी थी. इससे पहले प्रशासन ने किसान नेताओं के साथ बैठक की, लेकिन बैठक में कोई नतीजा नहीं निकलने के बाद किसानों ने हाईवे और रेलवे ट्रैक की ओर बढ़ने का प्रयास किया. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 200 से अधिक किसानों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें पुलिस लाइन में रखा गया है.
किसानों की प्रमुख मांगों में कर्ज माफी शामिल है. पंजाब के किसान लंबे दिनों से कृषि लोन माफी की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश सरकार उस पर भरोसा नहीं दे रही है. इसे लेकर किसानों में गुस्सा और नाराजगी है. इसके अलावा, शंभू-खनौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा और लैंड मॉर्गेज बैंकों द्वारा किसानों से लिए गए खाली चेकों के कथित दुरुपयोग को रोकने सहित अन्य मांगें भी उठा रहे हैं.
किसान नेताओं ने पंजाब सरकार और प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सरकार बैठकों के दौरान उनकी मांगों को जायज मान चुकी है, लेकिन इसके बावजूद मांगों के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. किसानों के कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस ने गांव संधवां में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था. पुलिस द्वारा मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है.
यह धरना एक बड़े अभियान का हिस्सा था, जिसके तहत किसान यूनियनें पंजाब एग्रीकल्चर डेवलपमेंट बैंकों के बाहर अनिश्चितकालीन धरना दे रही थीं. उनका मकसद राज्य सरकार पर दबाव बनाना था ताकि वह उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर कार्रवाई करे.
नाम न बताने की शर्त पर एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा तीन दिन की मोहलत दिए जाने के बावजूद राज्य प्रशासन के साथ बातचीत अटकी रही, जिसके बाद यूनियन नेताओं ने मालवा इलाके में सड़क और रेल यातायात बाधित करने की योजना पर आगे बढ़ने का फैसला किया. इसी वजह से, प्रस्तावित नाकेबंदी शुरू होने से पहले ही पुलिस को विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी.
किसान नेता काका सिंह कोटरा ने पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की. उन्होंने हिरासत में लिए जाने की घटना को अलोकतांत्रिक बताया और चेतावनी दी कि अगर हिरासत में लिए गए सभी लोगों को बिना शर्त रिहा नहीं किया गया, तो पूरे राज्य में नया आंदोलन शुरू किया जाएगा.
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