गोहाना में धान खरीद मामले में भाकियू चढ़ूनी का विरोध जारी हैहरियाणा सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा 8 अक्टूबर 2026 को जारी एक नए आदेश ने तूल पकड़ लिया है. भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने पत्र क्रमांक आर.पी.-1-83-2026/RA-1959 पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे तत्काल वापस लेने या संशोधित करने की मांग की है. यूनियन का कहना है कि धान की तुलाई (तौल) किए बिना सीधे शेलर परिसर में फसल भेजने की अनुमति देना सरकारी खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता को पूरी तरह खत्म कर देगा.
भाकियू चढ़ूनी (BKU चढ़ूनी) ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आशंका जताई है कि बिना मंडी में तौल और सरकारी रिकॉर्ड के सीधे शेलर में धान जाने से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो सकती है. पत्र में लिखा है, इस व्यवस्था की आड़ में अन्य प्रदेशों से सस्ता धान या चावल लाकर उसे सरकारी खरीद में खपाए जाने की पूरी संभावना है. संगठन के अनुसार, शेलर परिसरों में पर्याप्त सरकारी निगरानी और गाड़ियों के तौल का पारदर्शी रिकॉर्ड रखे बिना ऐसी छूट देना किसानों के हक पर डाका डालने जैसा है.
यूनियन ने सरकार के उस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें उठान में देरी का कारण तुलाई व्यवस्था को बताया जा रहा था. चढ़ूनी ग्रुप का कहना है कि एक वाहन की तुलाई में महज 5 से 10 मिनट का समय लगता है, ऐसे में इसे देरी का मुख्य कारण बताना व्यावहारिक नहीं है. यदि किसी मंडी में कांटों की कमी है, तो वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, न कि पूरी व्यवस्था को ही दांव पर लगा दिया जाए.
सरकारी दावों के उलट मंडियों में खरीद व्यवस्था की गंभीर खामियां उजागर हुई हैं. भाकियू चढ़ूनी के प्रतिनिधिमंडल ने जब नरवाना मंडी का दौरा किया तो स्थिति बेहद चिंताजनक मिली. प्रदेश में 29 सितंबर से धान की खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन 8 अक्टूबर तक भी खरीद एजेंसियों को शेलर आवंटित नहीं किए गए थे और न ही उठान के लिए वाहनों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) हुआ था. विभागीय सुस्ती का आलम यह था कि प्रतिनिधिमंडल के हस्तक्षेप के बाद उस दिन महज दो गाड़ियां ही लोड हो सकीं. यही स्थिति गोहाना मंडी में भी देखने को मिल रही है, जहां समय पर तैयारियां न होने से धान का उठान पूरी तरह ठप पड़ा है.
किसान संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शेलर मालिकों को सीधे धान मंगाने की खुली छूट मिली, तो वास्तविक किसानों की फसल लटक जाएगी. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने में परेशानियां आएंगी और शेलर मालिक क्वालिटी के नाम पर कटौती कर किसानों को आर्थिक चपत लगाएंगे. इससे न सिर्फ किसानों को नुकसान होगा, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी चूना लगेगा.
विभाग के 8 अक्टूबर 2026 के पत्र पर तुरंत रोक लगाई जाए.
सभी मंडियों में या उनके आसपास निर्धारित सरकारी कांटों पर ही धान की तुलाई और रिकॉर्डिंग सुनिश्चित हो.
मंडी में तौल और रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद ही धान को शेलर में ले जाने की अनुमति मिले.
शेलर आवंटन और वाहनों के पंजीकरण की प्रक्रिया को बिना देरी तुरंत पूरा कर उठान तेज किया जाए.
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