
सई नदी, लोन नदी और गंगा नदी के किनारे बसे रायबरेली जिले में मंगलवार को ‘किसान तक’ का किसान कारवां विकास खंड महराजगंज के जमुरावां गांव पहुंचा. उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चल रही इस विशेष ग्राउंड कवरेज के तहत यह कारवां का 26वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और आधुनिक खेती, पशुपालन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की. इस आयोजन में कृषि विभाग, पशुपालन विभाग के अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, स्वयं सहायता समूह और प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली. विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत बीज चयन, फसल संरक्षण, मृदा परीक्षण, जैविक और प्राकृतिक खेती के तरीकों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी.

धान, गेहूं और सब्जी उत्पादन के लिए मशहूर जिले में किसान कारवां के पहुंचते ही गांव में उत्साह का माहौल दिखा. कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं सीधे अधिकारियों के सामने रखीं. सवाल-जवाब के सत्र में विभागीय अधिकारियों ने अलग-अलग चरणों में समाधान और सुझाव साझा किए. हार्वेस्ट पल्स की ओर से भी किसानों को अपने कृषि उत्पादों और पोषण आधारित किस्मों की जानकारी दी गई. कार्यक्रम में अतिथियों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया, जबकि लकी ड्रा के जरिए किसानों को नकद पुरस्कार भी दिए गए.

पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र रायबरेली द्वितीय के एग्रोनॉमिस्ट डॉ. सुधांशु वर्मा ने बताया कि लगातार रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वराशक्ति घट रही है. इसे सुधारने के लिए गोबर खाद और जैविक खाद का प्रयोग जरूरी है. उन्होंने कहा कि एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने से उत्पादन के साथ किसानों की आमदनी में भी 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है.

दूसरे चरण में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. के. द्विवेदी ने मुख्यमंत्री सहभागिता योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि किसान गौशालाओं से पशु लेकर पशुपालन कर सकते हैं. बकरी पालन, मुर्गी पालन, भैंस पालन, खरगोश और भेड़ पालन पर अनुदान की भी जानकारी दी गई. साइलेज बनाने और उसे पशुओं को खिलाने से दूध उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया.

तीसरे चरण में हार्वेस्ट पल्स की अधिकारी जेन फ्लोरिना ने बायोफोर्टीफाइड वैरायटी के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि इन किस्मों की खेती में अलग तकनीक की जरूरत नहीं होती और उत्पादन के साथ जिंक, आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भी मिलते हैं.

चौथे चरण में भारतीय उद्यान निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार ने मशरूम, स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों की खेती पर जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सोलर ड्रायर और पॉलीहाउस पर सरकार 40 फीसदी तक अनुदान दे रही है.

आखिरी चरणों में मिट्टी जांच, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, फार्मर आईडी और पंजीकरण की उपयोगिता समझाई गई. मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़े संदेश दिए. कार्यक्रम का समापन लकी ड्रा के साथ हुआ, जिसमें किसानों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. 10 विजेताओं को 500 रुपये और दूसरा पुरस्कार 2000 रुपये राजरानी को मिला. वहीं, प्रथम पुरस्कार किसान राधेश्याम को 3000 रुपये दिए गए. यह किसान कारवां किसानों के लिए सीख, संवाद और प्रेरणा का एक मजबूत मंच बनकर सामने आया, जहां आधुनिक खेती से आमदनी बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके साझा किए गए.
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