
अंगूर का नाम सुनते ही सबके मुंह में पानी आ जाता है. इसका रसीला स्वाद लोगों को भाता है. यही नहीं अंगूर खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. इसके स्वाद और गुणों को देखते हुए बाज़ार में इसकी मांग बनी रहती है और किसानों को दाम भी अच्छा मिलता है.किसान इसकी खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं. वैसे तो कई रंग के अंगूर बाजार में आपको मिल जाएंगे लेकिन सबसे अधिक काले अंगूर की मांग बाजार में ज्यादा होती है. ऐसे में काले अंगूर की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है.दुनिया में काले अंगूर की कई किस्में मौजूद हैं. लेकिन व्यवसाय के तौर पर कुछ ही इस्तेमाल किया जाता है.अंगूर की अधिक पैदावार लेने के लिए किसानों को उसको सही समय पर खेती और अच्छी किस्मों का चयन करना बेहद जरूरी है, इसकी कुछ ऐसी किस्में हैं, जिसमें न कीट लगते हैं और न ही रोग होता है. इन किस्मों की खेती से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

ब्युटी सीडलेस
यह किस्म जल्दी पकने वाली होती है ,इसका गुदा मुलायम होता है और इसके दाने छोटे और मध्यम आकर की होती है.इस किस्म का ज्यादातर प्रयोग जूस को पीने की लिए किया जाता है. इस किस्म में लगने वाली फल मध्यम आकर के होते है.

काली शाहबी
यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 12 से 15 किवंटल की पैदावार देती है ,और यह आकर में भी मध्यम होती है यह किस्म मुख्य रूप से महाराष्ट और आन्ध्रप्रदेश में में अधिक उगाई जाती है.

अरका श्याम
यह बंगलौर ब्लू और काला चंपा के बीच का क्रॉस है.इसकी बेरियां मध्यम लंबी, काली चमकदार, अंडाकार गोलाकार, बीजदार और हल्के स्वाद वाली होती है. यह किस्म एंथराकनोज के प्रति प्रतिरोधक है. यह टेबल उद्देश्य और शराब बनाने के लिए उपयुक्त है.

अरका नील मणि
यह ब्लैक चंपा और थॉम्पसन बीजरहित के बीच एक क्रॉस है. इसकी बेरियां काली बीजरहित, खस्ता लुगदी वाली और 20-22 प्रतिश टीएसएस की होती है. यह किस्म एंथराकनोज के प्रति सहिष्णु है. औसतन उपज 28 टन/हेक्टेयर है. यह शराब बनाने और तालिका उद्देश्य के लिए उपयुक्त है.

अरका कृष्णा
यह ब्लैक चंपा और थॉम्पसन बीजरहित के बीच एक क्रॉस है. इसकी बेरियां काले रंग, बीजरहित, अंडाकार गोल होती है और इसमें 20-21 प्रतिश टीएसएस होता है. औसतन उपज 33 टन/हेक्टेयर) है. यह किस्म जूस बनाने के लिए उपयुक्त है.
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