
उत्तर प्रदेश के किसानों से सीधे संवाद करने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए किसान कारवां 2.0 की शुरुआत हो गई है. किसान तक और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से इस अभियान का पहला कार्यक्रम 16 सितंबर को गोरखपुर में आयोजित किया गया. योगीराज गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में हुई किसान महासभा में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे. किसानों ने खेती, फसल, बाजार, तकनीक और उनकी आय से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की.

किसान कारवां 2.0 की पहली क्षेत्रीय किसान महासभा की शुरुआत सुबह 10 बजे हुई. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. गोरखपुर मंडल के आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे. इस दौरान किसानों को कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों से सीधे बातचीत करने का मौका मिला. कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों की जमीनी समस्याओं को सामने लाना और उनके अनुभवों को साझा करना रहा.

किसान कारवां 2.0 को सिर्फ खेती से जुड़ी चर्चा तक सीमित नहीं रखा गया. कार्यक्रम में किसानों के मनोरंजन के लिए खास इंतजाम भी किए गए. क्षेत्र के लोक गायक मनोज मिहिर ने किसानों के सामने कई लोकगीत प्रस्तुत किए. वहीं जादूगर सलमान ने अलग-अलग जादू के करतब दिखाकर किसानों का मनोरंजन किया. इससे कार्यक्रम में खेती की गंभीर चर्चा के साथ स्थानीय संस्कृति और मनोरंजन का रंग भी देखने को मिला.

किसान कारवां 2.0 की पहली बड़ी चर्चा काला नमक चावल को लेकर हुई. पूर्वांचल के सिद्धार्थनगर और आसपास के इलाकों में काला नमक चावल की खेती लंबे समय से होती रही है. पैनल में चर्चा की गई कि किसानों की मेहनत और वैज्ञानिक प्रयासों से इस पारंपरिक चावल को किस तरह नई पहचान मिली. चर्चा में वैज्ञानिक राम चेत चौधरी के योगदान का भी उल्लेख किया गया. काला नमक चावल को पहचान दिलाने के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है.

दूसरे पैनल में 'पूर्वांचल की गन्ने की मिठास' विषय पर चर्चा हुई. इसमें गन्ने की खेती से जुड़े विशेषज्ञों, अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया. चर्चा के दौरान गन्ने की खेती, किसानों की आय, उत्पादन और इस फसल से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर बात हुई. विशेषज्ञों ने बताया कि गन्ना उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है और पूर्वांचल के किसानों के लिए भी यह एक अहम फसल है.

तीसरे पैनल का विषय 'तकनीक से तरक्की' रहा. इसमें खेती में आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर चर्चा की गई. विशेषज्ञों ने बताया कि नई तकनीक किसानों के लिए खेती को आसान बनाने के साथ उत्पादन बढ़ाने में भी मदद कर सकती है. ड्रोन, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से किसानों को फसल की निगरानी और खेती के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है. इस चर्चा में तकनीक को किसानों की आय से जोड़ने पर भी जोर दिया गया.

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसान कारवां 2.0 की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने का काम करते हैं. उन्होंने प्रदेश में कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के लिए किए जा रहे कई कामों की जानकारी दी. कृषि मंत्री ने गन्ने के भुगतान, गेहूं खरीद, पीडीएस, काला नमक चावल, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि शिक्षा से जुड़े प्रयासों का जिक्र किया.

कृषि मंत्री ने काला नमक चावल की खेती का उदाहरण देते हुए बताया कि कभी इसकी खेती करीब 350 एकड़ तक सीमित रह गई थी, जो अब बढ़कर करीब 5,000 एकड़ तक पहुंच गई है. उन्होंने बताया कि काला चावल अब दूसरे देशों में भी भेजा जा रहा है. कृषि मंत्री ने प्रदेश में 20 नए कृषि विज्ञान केंद्र, नए कृषि विश्वविद्यालय और करीब 8 लाख किसानों को मुफ्त बीज उपलब्ध कराने की बात भी कही. उन्होंने उत्तर प्रदेश से करीब 11 लाख मीट्रिक टन चावल के निर्यात का भी उल्लेख किया. अपने संबोधन के दौरान उन्होंने दाल उत्पादन और फसल विविधीकरण पर भी बात की. उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती हो रही है.

किसान कारवां 2.0 में खेती के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले किसानों को सम्मानित करने की भी पहल की गई है. इसके तहत अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों से 10-10 किसानों को 'कृषि वीर' के रूप में चुना जाएगा. गोरखपुर में आयोजित पहली किसान महासभा में अलग-अलग जिलों से चुने गए किसानों को सम्मानित किया गया. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने चयनित किसानों को प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया. सम्मान पाने वालों में दीपक कुशवाहा, अविनाश कुमार, लालजी कुशवाहा, मालती देवी, वेदव्यास सिंह, जय सिंह कुशवाहा, कर्नल के.सी. मिश्रा, आज्ञाराम वर्मा, राजू सिंह और सीमा गुप्ता शामिल रहे. आज्ञाराम वर्मा के नाम पर गन्ने की एक वैरायटी रिलीज हुई है, जबकि राजू सिंह एफपीओ और शहद उत्पादन से जुड़े हैं. देवरिया की सीमा गुप्ता को ड्रोन के क्षेत्र में काम के लिए 'ड्रोन दीदी' के तौर पर भी पहचान मिली है.

किसान कारवां 2.0 के दौरान कृषि परिषद के गठन की जानकारी भी दी गई. इस परिषद में कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ प्रगतिशील किसानों को भी शामिल किया जा रहा है. इसका उद्देश्य किसानों की जमीनी समस्याओं और सुझावों को सरकार तक पहुंचाना और दोनों के बीच संवाद को मजबूत करना है. किसान कारवां 2.0 का अगला पड़ाव अब झांसी होगा. 24 सितंबर को बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों के लिए अगली क्षेत्रीय किसान महासभा आयोजित की जाएगी. इसमें किसान, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, अधिकारी और प्रगतिशील किसान शामिल होंगे. यहां बुंदेलखंड की खेती की समस्याओं, नई तकनीक, फसल विविधीकरण और किसानों की आय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. इस अभियान के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के किसानों की स्थानीय समस्याओं को सामने लाने और खेती से जुड़े समाधान पर बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
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