
उत्तर प्रदेश की मंडियों में किसान लंबे समय से आढ़ती और स्थानीय व्यापारियों के जरिए अपनी फसल बेचते आए हैं. लेकिन अब इस पारंपरिक व्यवस्था के साथ डिजिटल मंडी का विकल्प भी जुड़ रहा है. e-NAM यानी नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट के जरिए किसानों, व्यापारियों और मंडियों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि कृषि उपज की खरीद-बिक्री ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से हो सके.

उत्तर प्रदेश e-NAM से जुड़ने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल है. प्रदेश में 33 लाख 5 हजार से ज्यादा किसान इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड हैं. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में किसान अब मंडी के भाव, खरीदारों और डिजिटल कारोबार से जुड़ी जानकारी के लिए ऑनलाइन व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, रजिस्ट्रेशन और वास्तव में e-NAM के जरिए फसल बेचने का आंकड़ा अलग-अलग होता है.

आगरा मंडल की मंडियां भी e-NAM नेटवर्क से जुड़ रही हैं. आगरा मंडी में 27,680 किसान और 403 व्यापारी रजिस्टर्ड हैं. वहीं, अछनेरा मंडी में 60 किसान और 35 व्यापारी सहित फतेहपुर सीकरी मंडी में 126 किसान और 8 व्यापारी इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं. पूरे आगरा मंडल की 11 मंडियों में 1,33,749 किसान और 1,931 व्यापारी रजिस्टर्ड हैं.

e-NAM में सिर्फ फसल की खरीद-बिक्री ही नहीं, बल्कि उसकी क्वालिटी पर भी ध्यान दिया जाता है. एसेइंग और ग्रेडिंग की मदद से उपज की क्वालिटी का आकलन किया जाता है. इससे खरीदार को यह समझने में मदद मिलती है कि फसल किस क्वालिटी की है और उसके हिसाब से कितनी बोली लगाई जा सकती है. इससे बेहतर क्वालिटी वाली उपज को उसके अनुरूप कीमत मिलने की संभावना बढ़ती है.

किसान के लिए सबसे बड़ा सवाल उसकी फसल का सही भाव होता है. e-NAM का उद्देश्य किसानों को ज्यादा खरीदारों और बाजारों से जोड़ना है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खरीदार बोली लगा सकते हैं, जिससे खरीदारी में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की कोशिश होती है. ऑनलाइन ट्रेडिंग और डिजिटल भुगतान की व्यवस्था मंडी के लेन-देन को रिकॉर्ड में रखने और पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद कर सकती है.

e-NAM अब सिर्फ किसानों और व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है. उत्तर प्रदेश की मंडियों में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान e-NAM के जरिए 10.89 लाख मीट्रिक टन कृषि उपज का कारोबार हुआ. यह आंकड़ा बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को मंडियों के वास्तविक कारोबार से जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है. आने वाले समय में इसका दायरा और बढ़ाने पर जोर है.

e-NAM की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि कितने किसान पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं. असली फायदा तब होगा, जब किसान को अपनी फसल का सही बाजार भाव पता चले, ज्यादा खरीदारों तक पहुंच मिले, क्वालिटी के आधार पर उचित कीमत मिले और भुगतान समय पर खाते में पहुंचे. अगर डिजिटल व्यवस्था किसान की मंडी में होने वाली खरीद-बिक्री और उसकी आमदनी को बेहतर बनाने में मदद करती है, तभी e-NAM का असर सीधे किसान की जेब तक पहुंचा माना जाएगा. (अरविंद शर्मा की रिपोर्ट)
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