
यूपी का बुंदेलखंड लंबे समय से पानी की कमी के लिए जाना जाता रहा है। बारिश कम होने पर किसानों के सामने सिंचाई का बड़ा संकट खड़ा हो जाता था. लेकिन अब सरकारी योजनाओं और सिंचाई सुविधाओं से कई इलाकों में हालात तेजी से बदल रहे हैं.

बांदा के मटौंध इलाके में पहले किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहते थे. लेकिन अब खेत तालाब योजना के तहत किसान अपने खेत में तालाब बनाकर बारिश का पानी जमा कर रहे हैं. वहीं, जरूरत पड़ने पर इसी पानी से फसलों की सिंचाई की जा रही है.

खेत तालाब योजना के तहत किसानों को तालाब खुदवाने के लिए सरकार की ओर से आर्थिक मदद भी दी जा रही है. विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों को 52,500 रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है, जिससे खेत में पानी जमा करने की सुविधा तैयार हो सके.

तालाब में जमा पानी से किसान बारिश के बाद भी अपनी फसलों की सिंचाई कर पा रहे हैं. इससे गेहूं, धान, सरसों, चना और अरहर जैसी फसलों को पानी मिल रहा है. पहले पानी की कमी के कारण कई बार फसल सूख जाती थी और खेत खाली रह जाते थे.

किसानों के मुताबिक, पहले खेती से लागत निकालना भी मुश्किल होता था. लेकिन अब सिंचाई की सुविधा मिलने से उत्पादन और खेती का रकबा बढ़ा है. किसानों का कहना है कि जहां पहले 15 से 50 हजार रुपये की फसल बिक्री मुश्किल से होती थी, वहीं अब कई किसान एक फसल से 2 से 3 लाख रुपये तक कमा रहे हैं.

भूमि संरक्षण विभाग के मुताबिक, खेत तालाब योजना से अब तक 4,800 से ज्यादा किसान लाभान्वित हो चुके हैं. इस साल भी 255 किसानों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है. किसानों को तालाब के साथ पाइप और स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई सुविधाओं पर भी सब्सिडी का लाभ मिल रहा है.

सिंचाई की सुविधा बढ़ने से किसानों को खेती में भरोसा बढ़ा है. पहले पानी की कमी के कारण खेत बंजर छोड़ने और रोजगार के लिए बाहर जाने की नौबत आती थी. लेकिन अब खेत में पानी उपलब्ध होने से किसान ज्यादा फसल ले पा रहे हैं और खेती से उनकी आमदनी बढ़ रही है.
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