
बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी के चोलापुर ब्लॉक स्थित बबियाव गांव में ‘किसान तक’ कारवां का 55वां पड़ाव आयोजित किया गया. उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में चल रही इस श्रृंखला के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती, नई तकनीक, सरकारी योजनाओं और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ना रहा.

कार्यक्रम के पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र की पशुपालन शाखा की वैज्ञानिक डॉ. पूजा सिंह ने किसानों को बताया कि वर्तमान समय में पशुपालन आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है. उन्होंने देसी नस्ल की गाय पालन के लाभ, बकरी पालन की उपयोगिता और पशुओं में होने वाली प्रमुख बीमारियों जैसे खुरपका-मुंहपका और थनैला के बचाव के उपायों की जानकारी दीं.

दूसरे चरण में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने किसानों को बताया कि बदलते मौसम के अनुरूप नई और उन्नत किस्मों के बीज तैयार किए जा रहे हैं. ये बीज कम समय में अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है.

तीसरे चरण में सहायक विकास अधिकारी 'कृषि', देवमणि त्रिपाठी ने रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर पड़ रहे प्रभाव को समझाया. उन्होंने किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी और पशुपालन को खेती के साथ जोड़ने पर जोर दिया.

चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रसार डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) को बढ़ावा दिया जा रहा है. एफपीओ के माध्यम से किसान संगठित होकर अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर रहे हैं और बाजार तक सीधी पहुंच बना पा रहे हैं.

पांचवें चरण में अजगरा विधायक डॉ. त्रिभुवन राम ने किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए लगातार प्रयासरत है और ऐसे कार्यक्रम किसानों के लिए बेहद लाभकारी हैं.

छठे चरण में उद्यान विभाग के निरीक्षक सुधांशु सिंह ने किसानों को सिंघाड़ा, ड्रैगन फ्रूट और मखाना जैसी फसलों की खेती के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इन फसलों पर सरकार द्वारा सब्सिडी और सिंचाई सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं.

सातवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. नवीन कुमार सिंह ने बताया कि आने वाले समय में खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि युवा किसान तकनीक का उपयोग कर खेती को अधिक लाभकारी बना रहे हैं.

आठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र चंदौली के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से महिला और युवा समूह अपनी आय बढ़ा सकते हैं. इसके लिए प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है.

नौवें चरण में किसान तक के वरिष्ठ पत्रकार जयप्रकाश सिंह ने कहा कि आज के युवा कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप के माध्यम से नए अवसर तलाश रहे हैं. उन्होंने अमूल का उदाहरण देते हुए बताया कि छोटे स्तर से शुरू होकर भी बड़े ब्रांड बनाए जा सकते हैं.

दसवें चरण में महिला किसान अनीता पटेल ने अपनी सफलता की कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में खेती शुरू की और आज मुर्गी पालन, बकरी पालन और मछली पालन के जरिए अपनी आय कई गुना बढ़ा ली है.

ग्यारहवें चरण में फसल वैज्ञानिक डॉ. श्री प्रकाश सिंह ने किसानों को सर्टिफाइड बीज उत्पादन की तकनीक समझाई. उन्होंने खेत में अलग पौधों की पहचान कर उन्हें हटाने और समान गुणवत्ता वाले बीज तैयार करने के तरीके बताए.

बारहवें चरण में प्रगतिशील किसान शैलेंद्र रघुवंशी ने बताया कि उनके एफपीओ से 4000 से अधिक किसान जुड़े हैं. उन्होंने नर्सरी के माध्यम से उन्नत पौधों की आपूर्ति कर किसानों की आय बढ़ाने में योगदान दिया है.

तेरहवें चरण में इफको के सुनील मौर्य ने किसानों को नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के सही उपयोग की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 30 दिन के बाद छिड़काव करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं.

चौदहवें चरण में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीएन श्रीवास्तव ने सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि तकनीक से मादा पशु प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे दूध उत्पादन बढ़ता है.

कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों को पुरस्कार दिए गए, जिसमें 10 लोगों को पुरस्कार के तौर पर 500 रुपये मिले. इसके अलावा पुरस्कार 2000 रुपये प्रेमा और पहला पुरस्कार 3000 रुपये सुनीता देवी को मिला.
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