
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत सेलाईडीह गांव में सदियों से पारंपरिक तरीके से 6.1 फीसदी करक्यूमिन युक्त ऑर्गेनिक हल्दी की खेती की जा रही है. क्वालिटी के मामले में यह हल्दी देश की चर्चित लाकाडोंग हल्दी से किसी भी तरह कम नहीं है, लेकिन आज भी यहां के किसान अपनी उपज की सही दाम के लिए लिए संघर्ष कर रहे हैं.

स्थानीय किसानों के अनुसार, समस्या उत्पादन या क्वालिटी में नहीं बल्कि ब्रांडिंग, मार्केटिंग और संगठित खरीद सिस्टम की कमी में है. यही कारण है कि प्रीमियम क्वालिटी की यह हल्दी भी स्थानीय बाजार में औने-पौने दाम में बिक जाती है. रायजामा के ग्राम प्रधान सुखदेव सरदार ने बताया कि यह खेती उनके गांव की परंपरा का हिस्सा रही है.

ग्राम प्रधान ने कहा कि एक समय यहां नक्सलवाद का असर था और कुछ युवा भटककर अफीम की खेती करने लगे थे, लेकिन प्रशासन और पुलिस के प्रयास से लोग फिर से अपनी पारंपरिक खेती की ओर लौटे हैं. आज हमारी हल्दी की क्वालिटी किसी से कम नहीं है लेकिन बाजार में पहचान नहीं होने के कारण व्यापारी हमें कम कीमत देकर खरीद लेते हैं.

सुखदेव सरदार ने यह भी जोड़ा कि यदि सही प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय मार्केट से जुड़ाव हो तो यह हल्दी वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकती है. सेलाईडीह की आंगनबाड़ी सहायिका और महिला किसान मंजू देवी ने किसानों की वास्तविक स्थिति को सामने रखते हुए कहा कि महिलाएं भी इस खेती में बराबर की भागीदार हैं, लेकिन उन्हें मेहनत के अनुरूप लाभ नहीं मिलता. सरकारी संस्था हमारी कच्ची हल्दी मात्र 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदती है जिससे हमें घाटा लगता है.

अगर हम खुद प्रोसेसिंग कर हल्दी पाउडर बनाकर बाजार में बेचते हैं तो करीब 200 रुपये प्रति किलो मिलते हैं. मगर यह भी हमारी ऑर्गेनिक हल्दी की असली कीमत के मुकाबले बहुत कम है. महिला किसान मंजू देवी ने कहा, मजबूरी में किसानों को स्थानीय बाजार पर ही निर्भर रहना पड़ता है जहां कीमतों का निर्धारण बिचौलियों द्वारा किया जाता है. हमारी मेहनत के हिसाब से यह कीमत बहुत कम है लेकिन सरकारी खरीद से तो बेहतर ही है.

इधर दामोदरी महिला प्रोसेसिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की सचिव सुमित्रा कुमारी ने बताया कि संस्था हल्दी की प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग पर काम कर रही है. हमने ब्रांडिंग के प्रयास किए हैं और ऑनलाइन बिक्री की योजना भी बनाई है लेकिन सच्चाई यह है कि अब तक हमारी बिक्री केवल स्थानीय बाजार तक ही सीमित है. बड़े बाजार तक पहुंच बनाने के लिए हमें मजबूत नेटवर्क और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता है.

वहीं, जिले के उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कहा कि खरसावां और कुचाई क्षेत्रों में हल्दी उत्पादन में आई मामूली गिरावट पर प्रशासन नजर बनाए हुए है. हम ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर विशेष फोकस कर रहे हैं. राज्य स्तर पर भी समन्वय स्थापित किया गया है ताकि किसानों की उपज सीधे सरकारी प्लेटफॉर्म तक पहुंच सके. (मनीष कुमार लाल का इनपुट)
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