
जनपद की पहचान बन चुकी सुर्ख लाल अमरूद की नगरी में ‘किसान तक’ का किसान कारवां शेखपुरा रसूलपुर गांव पहुंचा. उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चल रही इस विशेष कवरेज का यह 54वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में क्षेत्र के किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर खेती से जुड़ी नई जानकारी हासिल की.

पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र कौशांबी के फसल वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार केसरी ने किसानों को गोबर खाद और हरी खाद के महत्व के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इनका प्रयोग करने से मिट्टी की स्वास्थ्य सुधरता है और उत्पादन बढ़ता है. इसके साथ ही उन्होंने जीरो बजट खेती के तहत बीजामृत, जीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र बनाने और उपयोग करने की विधि भी सिखाई.

दूसरे चरण में कृषि विभाग के सहायक विकास अधिकारी देवेंद्र नाथ तिवारी ने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के महत्व के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि सरकारी योजना का लाभ पाने के लिए रजिस्ट्री जरूरी है. साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि योजना की जानकारी देते हुए किसानों को ई-केवाईसी जल्द पूरा कराने की सलाह दी, ताकि रुकी हुई किस्त समय पर मिल सके.

तीसरे चरण में इफको एमसी के टेरिटरी मैनेजर अरविंद द्विवेदी ने बताया कि संस्था किसानों को उचित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक उपलब्ध करा रही है. उन्होंने बताया कि 15,000 रुपये तक के उत्पाद की खरीद पर 1 लाख रुपये तक का बीमा भी मिलता है, जो किसानों के लिए सुरक्षा कवच है.

चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि खेती और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं. उन्होंने देसी गाय के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि एक देसी गाय से 30 एकड़ तक खेती को जैविक रूप से मजबूत किया जा सकता है. साथ ही हरे चारे के उत्पादन से दूध उत्पादन बढ़ाकर आय में वृद्धि की जा सकती है.

पांचवें चरण में इफको के सहायक क्षेत्रीय अधिकारी आशीष पटेल ने किसानों को नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग के बारे में बताया. उन्होंने बीज उपचार की विधि समझाते हुए कहा कि 40 किलो गेहूं के बीज के लिए 200 मिली लिक्विड डीएपी को पानी में मिलाकर बुवाई से पहले उपचार करना चाहिए, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है.

छठे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र कौशांबी के अध्यक्ष अजय कुमार ने किसानों को आय बढ़ाने का मॉडल समझाया. उन्होंने बताया कि पारंपरिक धान-गेहूं की खेती से सीमित आय होती है, लेकिन यदि किसान एक एकड़ की 60% भूमि पर खेती और 40% पर मछली पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन और पशुपालन करें तो एक एकड़ से सालाना 7 से 8 लाख रुपये तक कमाए जा सकते हैं.

कार्यक्रम के सातवें चरण में जादूगर सलमान ने रोचक प्रस्तुति के माध्यम से मुर्गी पालन के फायदे बताए. उन्होंने किसानों को मनोरंजन के साथ-साथ आय बढ़ाने का संदेश दिया.

कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 किसानों को 500-500 रुपये के पुरस्कार दिए गए. दूसरा पुरस्कार 2000 और प्रथम पुरस्कार 3000 रुपये रखा गया, जिससे किसानों में उत्साह और बढ़ गया. पहला पुरस्कार उर्मिला देवी को मिला और दूसरा पुरस्कार गुड्डू राम को मिला.
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