
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे किसान तक के 'किसान कारवां' ने गुरुवार को अमेठी जिले के अशरफपुर गांव में अपना 27वां पड़ाव पार किया. इस दौरान जिले के किसानों ने बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लिया और इस अवसर पर उन्हें खेती से जुड़ी नई जानकारी दी गई.

पहले चरण में पशु चिकित्सा अधिकारी राज नारायण ने किसानों को गौ पालन से जुड़ी राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही नंद बाबा दुग्ध मिशन योजना के तहत मिलने वाली नंदिनी कृषक समृद्धि योजना, मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना और मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र अमेठी की वैज्ञानिक डॉ. रेनू सिंह ने किसानों को बताया कि कृषि में बेहतर कार्य करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कृषि विज्ञान केंद्र की कितनी बड़ी भूमिका है. इस विषय पर उन्होंने विस्तार से जानकारी दी. साथ ही महिलाओं को पोषण वाटिका करने का सुझाव दिया.

तीसरे चरण में IFFCO एमसी के प्रतिनिधि देवेंद्र यादव ने अपने 70 से अधिक रसायन-संबंधित उत्पादों के बारे में किसानों को जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह सभी उत्पाद खेती के नजरिए से काफी फायदेमंद और नुकसान देय नहीं है.

चौथे चरण में उप कृषि निदेशक, अमेठी, सतेंद्र कुमार ने जायद और खरीफ सीजन में किसानों को मिलने वाली बीजों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार द्वारा किसानों को क्वालिटी वाले बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में हुए बदलाव और किन किसानों को इसका लाभ मिलेगा.

पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र अमेठी के पशु वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि आज पशुपालन के जरिए बेरोजगारी की समस्या को कम किया जा सकता है. इसके साथ ही किसान यदि अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें खेती के साथ पशुपालन से जुड़ना होगा.

छठवें चरण में IFFCO के प्रतिनिधि सौरभ चतुर्वेदी ने नैनो यूरिया सहित नैनो डीएपी के बारे में जानकारी दी. उन्होंने नैनो डीएपी के सही उपयोग पर जानकारी देते हुए कहा कि IFFCO के उत्पादों पर बीमा की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है.

सातवें चरण में अमेठी जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ), डॉ गोपाल कृष्ण शुक्ला ने पशुओं में टैगिंग लगाने को लेकर किसानों को जागरूक किया. उन्होंने कहा कि जिस तरह इंसानों के लिए आधार कार्ड जरूरी है, वैसे ही पशुओं के लिए टैगिंग जरूरी है. इसी के जरिए पशुओं की पहचान हो पाती है और इसी टैगिंग के माध्यम से किसानों को पशुपालन से जुड़ी कई योजनाओं का लाभ मिलता है.

आठवें चरण में मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती और पशुपालन से जुड़ी जानकारी किसानों तक पहुंचाई. साथ ही उन्होंने गोबर खाद और पशुपालन करने का सुझाव दिया.

अंत में नौवें चरण में लकी ड्रॉ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये दिए गए. द्वितीय पुरस्कार 2000 रुपये रेनू को मिला, जबकि प्रथम पुरस्कार 3000 रुपये किसान यशोदा को दिया गया. अमेठी जिले में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि किसानों को नई उम्मीद और उत्साह भी दिया.
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