
गंगा और रामगंगा नदियों के बदौलत बिजनौर जिले की मिट्टी केवल उपजाऊ ही नहीं, बल्कि कृषि उद्योग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बना रही है. गन्ने की मिठास के बदौलत जनपद के किसान खुशहाल जिंदगी की होली खेल रहे हैं. वहीं, इंडिया टुडे ग्रुप और उत्तर प्रदेश सरकार की संयुक्त पहल से शुरू हुआ किसान कारवां प्रदेश के 75 जिलों की यात्रा में 66वें जनपद के तौर पर बिजनौर पहुंचा.

पहले चरण में केवीके बिजनौर की उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रतिमा गुप्ता ने किसानों को वैज्ञानिक विधि से बागवानी करने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को आम की बागीचा लगाने के सही समय और सही तरीके के बारे में विस्तार से जानकारी दी. किसान जब भी कोई आम का पौधा या फलदार वृक्ष की बागवानी करें, तो वह मान्यता प्राप्त नर्सरी और संस्थान से ही खरीदें.

दूसरे चरण में बिजनौर इफको के प्रतिनिधि शिवम तिवारी ने किसानों को गोबर खाद के साथ ढैंचा खेती करने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के बारे में जानकारी दी. साथ ही उन्होंने बताया कि यह किसानों के बीच अपनी जगह कैसे बना पाया है और इसके इतिहास का भी जिक्र किया.

तीसरे चरण में बिजनौर से इफको एमसी के प्रतिनिधि शंकी सोम ने किसानों को माइको जैन, शिरासागी, हुयूमेत्शू उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. आगे उन्होंने गन्ना फसल में लगने वाले कीट और रोगों से बचाव से जुड़ी जानकारी देते हुए शिरासागी और मोयासी के बारे में बताया.

चौथे चरण में जिला उद्यान अधिकारी आर. एन. वर्मा ने किसानों को फूलों की खेती के साथ मसाले की खेती, मधुमक्खी पालन सहित करने को लेकर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए सरकार द्वारा अधिकतम 5 करोड़ रुपए की राशि तय की गई है और इसके लिए सरकार द्वारा 35 फीसदी तक सब्सिडी भी दिया जाता है.

पांचवें चरण में बिजनौर सीवीओ डॉ. डी. के. अग्रवाल ने कहा कि पशुओं के इलाज के लिए दरवाजे तक सुविधा पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा शुरू की गई है और इसका लाभ किसान ले सकते हैं. वहीं, हाल के समय में कुल 10 गाड़ियां जिले में हैं. उन्होंने कहा कि इस एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने के लिए किसान को मात्र 5 रुपये की राशि देनी है.

छठवें चरण में धानुका प्रतिनिधि आशुतोष त्रिवेदी ने कंपनी के 90 उत्पादों के बारे में विस्तार से बताया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को धानुका के कोनिका, सेम्प्रा सहित अन्य उत्पादों का धान, गेहूं, गन्ना सहित अन्य फसलों में उपयोग कैसे करें, इसको लेकर जानकारी दी. उन्होंने धानुका के अन्य उत्पादों के बारे में जानकारी देते हुए उसके महत्व को लेकर जानकारी दी.

सातवें चरण में केवीके बिजनौर कृषि वैज्ञानिक डॉ. शिवांगी ने किसानों को मिट्टी की शक्ति कैसे बढ़े, इसको लेकर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसान हो सके तो अधिक से अधिक अपने खेतों में ढैंचा की खेती करें. इससे मिट्टी की ताकत बढ़ेगी और किसानों को कम उर्वरक का उपयोग करना पड़ेगा.

आठवें चरण में जिला कृषि अधिकारी बिजनौर डॉ. जसवीर सिंह तेवतिया ने किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी. साथ ही उन्होंने किसानों को किसान सम्मान निधि और फार्मर आईडी के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी और कहा कि अधिक से अधिक किसान फार्मर आईडी बनवाएं, ताकि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकें.

नौवें चरण में गन्ना विकास विभाग बिजनौर के अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने किसानों को कहा कि किसान अपने उपयोग के लिए सब्जियों की खेती जरूर करें. इसके साथ ही गन्ना में लगने वाले कई रोगों और उसके उपचार के बारे में उन्होंने बताया. इसके साथ ही सरकार की योजना के बारे में भी किसानों को विस्तार से जानकारी दी.

दसवें चरण में केवीके बिजनौर वैज्ञानिक डॉ. पिंटू कुमार ने गन्ना में लगने वाले रोगों के बारे में किसानों को विस्तार से जानकारी दी, जिसमें मुख्य रूप से उन्होंने शुगरकेन छोटी बेधक और गन्ने के कंडवा रोग के बारे में जानकारी दी. साथ ही उन्होंने आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक विधि से खेती करने का सुझाव किसानों को दिया.

ग्यारहवें चरण में केवीके बिजनौर हेड डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि अगर बिजनौर जिले के किसानों को किसी तरह की खेती में दिक्कत आती है, तो वह हमें जरूर बताएं. हम उनके गांव में कार्यक्रम करके उनकी समस्याओं का हल करेंगे.

बारहवें चरण में जादूगर सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. साथ ही हर शुभ अवसर पर वृक्ष लगाने की अपील की और आय दोगुनी करने के उपाय बताए.

तेरहवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 20 विजेताओं को 500 रुपये का पुरस्कार दिया गया. ‘किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
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