
फिरोजाबाद सिर्फ अपने कांच के लिए ही नहीं, बल्कि खेती के लिए भी जाना जाने लगा है. इंडिया टुडे और उत्तर प्रदेश सरकार ने किसान कारवां का आयोजन किया. यह कार्यक्रम बाबाईंन गांव में हुआ. इस कार्यक्रम का मकसद था कि किसानों को नई खेती की जानकारी मिले और उनकी आमदनी बढ़े.

जैसे ही किसान कारवां आया, आसपास के कई गांवों से बहुत सारे किसान आए. कुछ पुरुष थे, कुछ महिलाएं. सभी किसान बहुत खुश थे और नए तरीके सीखने के लिए उत्साहित थे. वे चाहते थे कि उनकी खेती ज्यादा अच्छी और फसल ज्यादा हो.

कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों ने किसानों को बहुत सारी बातें सिखाईं. उन्होंने बताया कि कैसे नई फसल उगाएं, मिट्टी की जांच करें, कीट और रोग से फसल बचाएं, और पानी बचाने के तरीके अपनाएं. उन्होंने बताया कि अगर किसान वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो फसल ज्यादा और अच्छी होगी.

फिरोजाबाद के किसान अब केवल पुराने फसल ही नहीं उगा रहे हैं. वे सब्जियां, दलहन, तिलहन और नकदी फसल भी उगा रहे हैं. इससे उनकी आमदनी बढ़ रही है और जीवन आसान हो रहा है. किसान कारवां ने यह सिखाया कि सही तरीके अपनाकर कम खर्च में ज्यादा फसल उगाई जा सकती है.

डॉ. ओंकार सिंह ने किसानों से कहा कि सही बीज और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ लें. डॉ. तेज प्रताप ने कहा कि सिंचाई को सही तरीके से करें. इससे पानी बचेगा और फसल अच्छी होगी. उन्होंने किसानों को “ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना के बारे में भी बताया.

डॉ. सत्येंद्र कुमार ने बताया कि अगर गोबर सड़क किनारे रखा जाए तो उसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. लेकिन अगर इसे सही तरीके से खेत में इस्तेमाल किया जाए, तो मिट्टी मजबूत होती है और फसल बढ़ती है. रमाकांत उपाध्याय ने कहा कि गाय हमारी खेती की सबसे बड़ी मददगार है. गाय से खेती की मिट्टी भी अच्छी होती है और हमारी संस्कृति का हिस्सा भी है.

इफको के राजेश कुमार ने किसानों को बताया कि नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी से फसल ज्यादा बढ़ सकती है. जाकिर खान ने बताया कि मिट्टी के सही नमूने लेने चाहिए. इससे उर्वरक संतुलित तरीके से लगाया जा सकता है और फसल अच्छी होती है. डॉ. नौशाद आलम ने कहा कि जैविक खाद और गोबर का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए, ताकि मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ें.

कार्यक्रम में किसानों के लिए लकी ड्रा भी हुआ. 3000 रुपये का पुरस्कार चंद्रपाल को मिला. 2000 रुपये का पुरस्कार हरी बाबू को मिला. 500 रुपये के 10 अन्य विजेता भी घोषित हुए. कुल मिलाकर, किसान कारवां कार्यक्रम किसानों के लिए बहुत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और मददगार रहा. आने वाले कार्यक्रम भी किसानों को नई खेती के तरीके और उन्नत तकनीक सिखाते रहेंगे.
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