मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल गांव मंडला की बनी वैश्विक पहचान, UN ने घोषित किया सर्वश्रेष्ठ पर्यटक गांव

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल गांव मंडला की बनी वैश्विक पहचान, UN ने घोषित किया सर्वश्रेष्ठ पर्यटक गांव

विदेशी पर्यटकों के बीच यहां का होमस्टे बेहद लोकप्रिय है. गांव में यह सुविधा गांव के आदिवासियों द्वारा दी जाती है. उन्हें मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की तरफ से इसका प्रशिक्षण दिया गया है. इतना ही नहीं यहां पर यह गांव इतना प्रसिद्ध हो रहा है कि ये तेजी से खजुराहो सर्किट का हिस्सा बन रहे हैं.

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मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल गांव मंडला की बनी वैश्विक पहचान, UN ने घोषित किया सर्वश्रेष्ठ पर्यटक गांव मंडला गांव फाइल फोटो

भारत एक खूबसूरत देश है और यहां पर कई ऐसे प्रदेश हैं जहां पर प्रकृति ने अदभूत सुंदरता बिखेरी है. यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने मध्यप्रदेश के छोटे से गांव मंडला को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ पर्यटक गांव घोषित किया है. वनों से घिरा हुआ यह छोटा सा गांव पन्ना टाइगर रिजर्व के बगल में है. मंडला गांव पंडला जल प्रपात     और गुफाओं से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर है और यूनेस्को विश्व की धरोहर से 20 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. सर्वश्रेष्ठ पर्यटक गांव के लिस्ट में शामिल होने वाला मंडला गांव पन्ना की पहाड़ियों और जंगलों से घिरा हुआ है. इसके अलावा केन नदीं इस गांव के पास से ही बहती है. वहीं इस सूची में गुजरात के धोर्डो     ने भी जगह बनाई है. 

बताया जाता है कि विदेशी पर्यटकों के बीच यहां का होमस्टे बेहद लोकप्रिय है. गांव में यह सुविधा गांव के आदिवासियों द्वारा दी जाती है. उन्हें मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की तरफ से इसका प्रशिक्षण दिया गया है. इतना ही नहीं यहां पर यह गांव इतना प्रसिद्ध हो रहा है कि ये तेजी से खजुराहो सर्किट का हिस्सा बन रहे हैं. गांव में आने वाले पर्यटकों को खाने के लिए बुंदेलखंडी पकवान का स्वाद मिलता है. साथ ही आदिवासियों के खुले दिल से आथित्य करने का अंदाज और उनकी संस्कृति, लोक संगीत औऱ नृत्य को देखने सुनने का मौका मिलता है.

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ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में आया सुधार 

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक मंडला गांव में होमस्टे कते लिए पहला घर तैयार करने वाले बलबीर सिंह गौड़ ने कहा कि उन्हें जानकर बेहद खुशी हुई है कि उनका गांव अब विश्व के मानचित्र पर आ गया है. अब अधिक से अधिक लोग उनके गांव के बारे में जान सकेंगे. अपने गांव में होमस्टे की शुरुआत करने से पहले बलबीर पन्ना टाइगर रिजर्व में नौकरी करते थे. होमस्टे शुरू करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी. उन्होनें बताया की उनके पास देने के लिए एक ही कमरा है, पर काफी संख्या में विदेशी पर्यटक हैं. इसलिए उन्होंने अपने और चार कमरों को होमस्टे में बदलने का फैसला किया है. इससे अब इतनी कमाई हो जाती है कि अपने परिवार को एक आरामदायक जीवन दे पा रहे हैं. 

विश्व के 260 गांवों में से हुआ है चयन

होमस्टे में घर की दीवारों पर बनी पेंटिग गांव की कला-संस्कृति को दर्शाती है. साथ ही गांव अहसास दिलाने के लिए पर्यटकों के साथ स्थानीय और पारंपरिक खेल खेले जाते हैं. वहीं मध्य-प्रदेश पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अपनी सांसकृतिक विविधता, स्थानीय मूल्य और पारंपरिक खाना बनाने की कला को संरक्षित रखने के लिए इस गांव ने संयुक्त राष्ट्र की सूची में अपनी जगह बनाई है. इस सूची में दुनियाभर के 260 संरक्षित गांवों की सूची से 74 नामों का चयन किया गया था. 

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नौ मानकों पर किया जाता है मूल्यांकन

यह सर्वश्रेष्ठ गांव की सूची का तीसरा संस्करण है. जिसे संयुक्त राष्ट्र ग्रामीण विकास कार्यक्रम के तहत एक पहल के रूप में शुरू किया गया था. इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और समावेशन को बढ़ावा देना है. इसके अलावा  जनसंख्या में गिरावट से निपटना है  और पर्यटन और टिकाऊ प्रथाओं के माध्यम से गांव में नये प्रयोगों को बढ़ावा देना है. गांव का चयन करने के लिए नौ क्षेत्रों का मूल्यांकन किया जाता है. जिसमें गांव की कला संस्कृति से लेकर बुनियादी ढांचा, कनेक्टीविटी, ,सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे कई मूलभूत मानकों पर गौर किया जाता है.
 

 

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