बंदरों के आतंक पर प्रशासन की कार्रवाईबिहार के सहरसा जिले में किसान बंदरों के आतंक से काफी परेशान हैं. इस बीच, उन किसानों के लिए और गांव के लोगों के लिए सिरदर्द बने बंदरों के उत्पात से अब मुक्ति मिलने की संभावना दिख रही है. दरअसल, ग्रामीणों की शिकायत पर वन विभाग ने दो दिनों तक अभियान चलाकर 20 बंदरों का रेस्क्यू किया है. विभाग के अनुसार यह रेस्क्यू अभियान अभी जारी रहेगा, जिससे किसानों को फसलों की नुकसान से मुक्ति मिल सकती है.
पिंजरे में बंद ये बंदर कल तक सहरसा जिले का बनगांव, चैनपुर और आसपास के गांवों में खूब उधम मचा रहे थे. गांव के किसान इनके उत्पात और आतंक से दशकों से परेशान हैं. सरकार से लेकर वरीय और जिले के विभागीय अधिकारी को लगातार आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी, लेकिन बीते दिनों ग्रामीणों के विशेष अनुरोध पर वन विभाग ने कार्रवाई शुरू की और दो दिनों तक लगातार अभियान चलाकर कुल 20 बंदरों का रेस्क्यू किया है. हालांकि इन गांवों में अभी भी बंदरों की संख्या हजारों में है.
सहरसा जिला मुख्यालय से सटे इन गांवों में बंदरों की कहानी बहुत पुरानी है. खेतों में बोए जाने वाले फसलों को ये बंदर चट कर जाते है. यदि उन बीजों से पौधे पनपकर निकल भी गए तो ये बंदर उन्हें उखाड़ कर खा जाते हैं. यह तो किसान और खेतों की समस्या हुई. इन बंदरों का उत्पात यहीं तक सीमित नहीं है. ये बंदर लोगों के घरों में घुसकर उनके बने-बनाये भोजन, कपड़े और सभी सामानों को क्षत-विक्षत कर देते हैं. आते-जाते राहगीरों को परेशान करना भी इनकी नियति रही है. 20 बंदरों का रेस्क्यू शुरू होने से गांव के लोगों को इनके उत्पात से राहत मिलने की संभावना दिख रही है.
वन विभाग के सहायक लिपिक, ओमप्रकाश ने बताया कि चैनपुर गांव से लगातार आवेदन आ रहे थे. गांव के किसान बंदरों के आतंक से परेशान थे, जिसके बाद किसानों के अनुरोध पर टीम बनाकर दो दिनों में 20 बंदरों का रेस्क्यू किया गया है. सभी बंदरों को सुंदरवन भेजा जा रहा है. यदि फिर आतंक मचाने की बात सामने आएगी तो, अभियान चलाकर और रेस्क्यू किए जाएंगे. (धीरज कुमार सिंह की रिपोर्ट)
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