ठगी का मास्टरमाइंड गिरफ्तारमहाराष्ट्र के जालना जिले से एक धोखाधड़ी की खबर सामने आई है, जहां अतिवृष्टि मुआवजा के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने वाला पकड़ा गया है. दरअसल, अतिवृष्टि मुआवजा घोटाले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है, जिसमें 24 करोड़ 90 लाख 77 हजार 811 रुपये का घोटाला करने वाला मुख्य सूत्रधार को जालना की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपी का नाम आशिष प्रमोद कुमार पैठणकर (उम्र 45 वर्ष) है. आरोपी घनसावंगी तहसील कार्यालय में सहायक राजस्व अधिकारी के पद पर कार्यरत था.
अंबड और घनसावंगी तहसील में अतिवृष्टि से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ था. इसके बाद शासन द्वारा चार अलग-अलग शासन निर्णयों के माध्यम से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा घोषित किया गया था. लेकिन संबंधित सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर अनुदान सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी लाभार्थियों के नाम शामिल किए, जिनके नाम पर कोई खेती ही मौजूद नहीं थी. इन फर्जी नामों के आधार पर मिली सरकारी मुआवजा राशि को आरोपियों ने खुद निकालकर सरकारी धन का 24.90 करोड़ रुपये से अधिक का गबन किया. इस पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन को मिलने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने त्रिसदस्यीय जांच समिति गठित की थी.
समिति की रिपोर्ट में सरकारी राशि के बड़े पैमाने पर गबन की स्पष्ट पुष्टि हुई. इसके बाद अंबड पुलिस थाने में 22 तलाठी, तहसील कार्यालय के आपदा प्रबंधन विभाग के 5 कर्मचारी और जिला कलेक्टर कार्यालय के 1 कर्मचारी सहित कुल 28 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. जांच के दौरान अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए. FIR दर्ज होते ही आरोपी फरार हो गए थे. पुलिस से बचने के लिए वे लगातार मोबाइल फोन और ठिकाने बदलते रहे, सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और कुछ आरोपी अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर छिपकर रह रहे थे.
मुख्य आरोपी आशिष पैठणकर पिछले पांच महीनों से फरार था और अग्रिम जमानत के लिए प्रयास कर रहा था. इसी बीच आर्थिक अपराध शाखा को आरोपी के जालना आने की गुप्त सूचना मिली. तकनीकी विश्लेषण के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रेस कर आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया. अब तक इस अतिवृष्टि अनुदान घोटाले में कुल 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी अभी भी फरार हैं.
फरार आरोपियों की तलाश जारी है. घोटाले की राशि वसूलने के लिए कुछ आरोपियों की संपत्तियों पर 'बोजा' यानी कुर्की लगाया गया है, कुछ के बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं और मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल सबूत भी जब्त किए गए हैं. इस मामले में अंबड सत्र न्यायालय और बॉम्बे हाईकोर्ट के छत्रपती संभाजीनगर खंडपीठ में दाखिल सभी अग्रिम जमानत अर्जियां खारिज कर दी गई हैं. जालना की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा मामले की आगे की जांच जारी है. (गौरव विजय साली की रिपोर्ट)
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