प्याज खरीद में बड़ी घपलेबाजीकेंद्र सरकार की मूल्य स्थिरीकरण कोष (Price Stabilisation Fund) योजना के तहत प्याज की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप एक बार फिर सामने आया हैं. किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि खरीद की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है. वहीं, इस मामले को लेकर किसान नेता अनिल घनवत, जो कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति के सदस्य भी थे, उन्होंने मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार को मूल्य स्थिरीकरण योजना के तहत प्याज की खरीद की जांच करनी चाहिए.
किसान नेता अनिल घनवत ने एक बयान में कहा कि किसान संगठनों और स्वतंत्र भारत पार्टी ने बार-बार NAFED और NCCF के माध्यम से प्याज की खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. कुछ चुनिंदा लोग करदाताओं के पैसे का गबन कर रहे हैं, जबकि यह योजना न तो किसानों और न ही उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचा पा रही है. किसानों को सही दाम नहीं मिल रहा है और उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर अच्छी क्वालिटी वाले प्याज नहीं मिल रहे हैं.
पिछले वर्ष प्याज की खरीद से संबंधित शिकायतों के बाद, राज्य और केंद्र सरकार की निरीक्षण टीमों ने भंडारित स्टॉक की जांच की थी. रिपोर्ट के अनुसार, निरीक्षण में कमी पाई गई और 40 से 50 प्रतिशत प्याज घटिया क्वालिटी का निकला था. अनिल घनवत ने दावा किया कि केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने कहा है कि भुगतान केवल निरीक्षण के दौरान भौतिक रूप से पाए गए स्टॉक के लिए ही किया गया था, जिससे अनुपलब्ध प्याज के लिए भुगतान की मांग पर सवाल उठते हैं.
ऐसे में अनिल घनवत ने खरीद प्रक्रिया की गहन जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि खरीद केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जानी चाहिए, खरीद रसीदों पर दर्ज किसानों के नामों का सत्यापन किया जाना चाहिए और जीपीएस ट्रैकिंग डेटा के साथ-साथ परिवहन रिकॉर्ड की भी जांच की जानी चाहिए. उन्होंने प्याज के आकार पर भी सवाल उठाया है. उन्होंने आगे कहा कि सरकार को यह सत्यापित करना चाहिए कि योजना के तहत वास्तव में कितने किसानों ने प्याज बेचा है.
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