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मध्य प्रदेश में गेहूं की अच्छी कीमत मिलने के बावजूद खरीद में सुस्ती, पैदावार घटने से किसान परेशान

मध्य प्रदेश में गेहूं की अच्छी कीमत मिलने के बावजूद खरीद में सुस्ती, पैदावार घटने से किसान परेशान

राजगढ़ जिले के भैंसवा गांव के किसान द्वारका प्रसाद मीना ने बताया कि पानी की कमी के कारण उनकी गेहूं की फसल प्रभावित हुई है. हालांकि उन्होंने बताया कि अपनी फसल को बचाने के लिए उन्होंने पूरी कोशिश की लेकिन इसके बाद भी उनकी उपज में 20 प्रतिशत तक की कमी आई है.

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मध्य प्रदेश में धीमी चल रही गेहूं खरीदी की रफ्तार (सांकेतिक तस्वीर) मध्य प्रदेश में धीमी चल रही गेहूं खरीदी की रफ्तार (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य प्रदेश में इस समय समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद की जा रही है. राज्य सरकार ने इस बार 80 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है जिसमें से 2 मई तक सिर्फ 37 लाख टन गेहूं की ही खरीद हो पाई है जो पिछले साल की इस अवधि की तुलना में 37.2 फीसदी कम है. पिछले साल रबी विपणन वर्ष 2023-24 के दौरान राज्य भर से पूरे सीजन में लगभग 79 लाख टन गेहूं की खरीद की गई थी. पूरे देश भर में 2 मई तक 221 लाख टन गेहूं की खरीद की गई जो पिछले साल की इस समान अवधि की तुलना में 4.9 प्रतिशत कम है. खरीद में गिरावट के मामले में मध्य प्रदेश सबसे आगे है. 

राज्य के किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए और अधिक से अधिक गेहूं खरीदने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,275 रुपये प्रति क्विटंल के ऊपर 125 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की थी. इसका फायदा किसानों को मिल रहा था क्योंकि इसके बाद उन्हें 2400 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत मिल रही थी. पर इसके बाद भी गेहूं खरीद के लक्ष्य से सरकार पीछे है. किसान बिक्री के लिए अधिक संख्या में नहीं आ रहे हैं जो कि एक चिंता का विषय है. 

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कम हुई पैदावार

दूसरी तरफ किसान पानी की कमी से जूझ रहे हैं. 'बिजनेस स्टैंडर्ड' की एक रिपोर्ट के अनुसार राजगढ़ जिले के भैंसवा गांव के किसान द्वारका प्रसाद मीना ने बताया कि पानी की कमी के कारण उनकी गेहूं की फसल प्रभावित हुई है. हालांकि उन्होंने बताया कि अपनी फसल को बचाने के लिए उन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन इसके बाद भी उनकी उपज में 20 प्रतिशत तक की कमी आई है. द्वारका प्रसाद मीना लगभग 20 एकड़ जमीन में गेहूं की खेती करते हैं. लेकिन अपर्याप्त बारिश और सिंचाई व्यवस्था के अभाव में उनकी फसल प्रभावित हुई है. धनिया की खेती पर भी इसका असर हुआ है. 

बेहतर कीमत की उम्मीद 

प्रदेश के एग्रीटेक स्टार्टअप एग्रीवाच के नित्यानंद रॉय ने खरीद में गिरावट का कारण बताते हुए कहा कि इसके कारण हो सकते हैं. किसान और बेहतर कीमत की उम्मीद में अपनी उपज रोके हुए हैं. अनुमान लगाते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 30-35 प्रतिशत किसानों ने अपना गेहूं बचा कर रखा है. इसके अलावा अलग-अलग किस्म के गेहूं की कीमत भी अलग-अलग है. सबसे महंगा लोकवाल गेहूं बिक रहा है. इंदौर की मंडी में यह 2900-3150 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है जबकि 'पूर्णा' किस्म की कीमत लगभग 2,650-3,000 रुपये प्रति क्विंटल है. ये दरें मध्य प्रदेश में गेहूं के बोनस और एमएसपी 2,400 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक हैं.

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गेहूं उत्पादन में कमी

नित्यानंद रॉय ने कहा कि राज्य में गेहूं के उत्पादन में कमी आई है. जबकि कुछ क्षेत्रों में बेमौसम हुई बारिश के कारण फसल की गुणवत्ता भी खराब हुई है. इसके कारण भारतीय खाद्य निगम ने अपने गुणवत्ता मानकों में ढील भी दी है. वहीं भैंसवा गांव के एक अन्य किसान सुरेश बाबू मीना बताते हैं कि इस साल लंबे सूखे के कारण उत्पादन लगभग आधा हो गया है. उनके कुएं सूख गए हैं. इसलिए वे अपने खेतों में पर्याप्त पानी भी नहीं दे पाते हैं. हालांकि जिन किसानों के पास गेहूं है, वो और अधिक कीमत की उम्मीद में अपनी फसल को रोके हुए हैं.