CM शिवकुमारकर्नाटक में गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है. किसान गन्ने का दाम 5,500 रुपये प्रति टन करने और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. इस बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने किसानों, चीनी मिल मालिकों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ अगले हफ्ते बैठक करने की घोषणा की है. उन्होंने प्रदर्शन कर रहे किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील की है, लेकिन किसान नेताओं ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है.
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को बेलगावी जिले के कित्तूर में गन्ना किसानों से मुलाकात की. किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने की मांग को लेकर पदयात्रा कर रहे हैं. शिवकुमार ने कहा कि दशहरा के बाद अगले हफ्ते चीनी मिल मालिकों, किसान नेताओं और केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई जाएगी. उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल राज्य सरकार के स्तर पर नहीं हो सकता. इसमें केंद्र सरकार, बैंक और चीनी मिल मालिकों को भी सहयोग करना होगा. सभी पक्षों को एक साथ बैठकर चर्चा करनी चाहिए, तभी किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकल सकता है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान जहां भी उनसे मिलने के लिए बुलाएंगे, वह वहां जाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने किसान नेता चुनप्पा पुजारी से भी बातचीत की है. राज्य के सहकारिता, कृषि और चीनी मामलों के मंत्री भी संबंधित अधिकारियों से चर्चा करने के लिए दिल्ली गए थे.
डीके शिवकुमार के मुताबिक, प्रस्तावित बैठक में गन्ने की कीमत, किसानों की MSP संबंधी मांगों और उन्हें आर्थिक मदद देने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. किसानों की मांगों का ज्ञापन भी केंद्रीय मंत्रियों को सौंपा जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर संभव हुआ, तो बैठक बेलगावी में ही आयोजित की जाएगी. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पहले किसानों को 300 रुपये प्रति टन अतिरिक्त मदद देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन चीनी मिल मालिक इसके लिए तैयार नहीं हुए. मिल मालिकों का कहना है कि उत्पादन लागत, बिजली खरीदने का खर्च और अन्य आर्थिक परेशानियों के कारण उनके लिए मिल चलाना मुश्किल हो रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि चीनी मिलों का चलना भी जरूरी है और किसानों का हित सुरक्षित रहना भी, इसलिए ऐसा समाधान निकालना होगा, जिससे दोनों पक्षों को राहत मिल सके. उन्होंने कहा कि केवल बयान देने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि सभी को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे.
गन्ना किसान अपनी उपज का बेहतर दाम पाने के लिए कई मांगें कर रहे हैं. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- गन्ने की कीमत बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति टन करना
- चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम करना
- इथेनॉल की कीमतों में संशोधन करना
- गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना
किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा.
मुख्यमंत्री की अपील के बावजूद किसान नेताओं ने आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है. किसान नेता चुनप्पा पुजारी ने कहा कि उनका आंदोलन केंद्र सरकार के खिलाफ है और गन्ने के लिए MSP घोषित होने तक जारी रहेगा. उन्होंने मांग की कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी रविवार दोपहर तक कित्तूर पहुंचें और किसानों की मांग पर फैसला घोषित करें. ऐसा नहीं होने पर किसान अपनी पदयात्रा दोबारा शुरू करेंगे और 'हुब्बल्ली चलो' विरोध प्रदर्शन करेंगे.
बता दें कि उत्तरी कर्नाटक के किसानों ने बेलगावी के पास पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो दिनों तक जाम लगाया था. इसके बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री के हुब्बल्ली स्थित आवास की ओर पदयात्रा शुरू की. किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने उनकी समस्याओं की जांच के लिए समिति तो बनाई है, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है. (PTI)
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