पुणे में पानी का संकट (सांकेतिक तस्वीर)महाराष्ट्र में सूखे के हालात को देखते हुए पुणे जिला प्रशासन ने पानी बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. खड़कवासला बांध प्रणाली से पानी की खपत में 20 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला लिया गया है. प्रशासन को आशंका है कि अगले साल मॉनसून आने में देरी हो सकती है, इसलिए अभी से पानी के इस्तेमाल की योजना बनाई जा रही है. इसके साथ ही सूखे से प्रभावित किसानों को दिवाली से पहले सरकारी सहायता दिलाने के लिए फसलों के नुकसान का आकलन 20 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
पुणे के कलेक्टर जितेंद्र दुडी ने बताया कि पानी की खपत में 20 प्रतिशत की कटौती का फैसला केवल खड़कवासला बांध प्रणाली के लिए लिया गया है. इस बांध प्रणाली में फिलहाल 82 प्रतिशत उपयोगी जल भंडार उपलब्ध है. वहीं, पवना बांध से पानी की खपत में पहले से लागू 10 प्रतिशत की कटौती जारी रहेगी. इस बांध में अभी 95 प्रतिशत पानी का भंडार है. महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही बांधों से पानी के इस्तेमाल में 10 प्रतिशत की कटौती करने का निर्देश दिया था. साथ ही जिला स्तर की समितियों को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कटौती करने का अधिकार दिया गया है.
प्रशासन का कहना है कि पानी का इस्तेमाल सावधानी से करना जरूरी है, ताकि आने वाले महीनों में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े. खासतौर पर अगले साल अप्रैल, मई और जून में पानी की कमी से बचने के लिए अभी से तैयारी की जा रही है.
कलेक्टर के मुताबिक, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान में दिसंबर से अल नीनो की स्थिति मजबूत होने की संभावना जताई गई है. इसका असर अगले मॉनसून पर भी पड़ सकता है. इसी आशंका को देखते हुए प्रशासन अब केवल जून तक नहीं, बल्कि 31 अगस्त 2027 तक पानी की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बना रहा है. पानी के इस्तेमाल में सबसे पहले पीने के पानी को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके बाद सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए पानी दिया जाएगा. प्रशासन ने पुणे के लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर करें.
महाराष्ट्र में सूखे का असर किसानों पर भी पड़ रहा है. पुणे जिले के 13 तालुकों में फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है. प्रशासन ने इस काम को 20 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, ताकि प्रभावित किसानों को दिवाली से पहले सरकारी सहायता मिल सके. जिले के 10 तालुकों में सूखा घोषित किया जा चुका है. इन इलाकों में फसल नुकसान का करीब 80 प्रतिशत आकलन पूरा हो गया है. वहीं, हाल ही में सूखा घोषित किए गए अंबेगांव और जुन्नार में 60 से 70 प्रतिशत तक आकलन पूरा हुआ है.
दूसरी ओर, मुल्शी, मावल और हवेली जैसे इलाकों में करीब 50 प्रतिशत आकलन किया जा चुका है. इन क्षेत्रों को सूखे से प्रभावित 10 तालुकों में शामिल नहीं किया गया है. इस काम में राजस्व, ग्रामीण विकास और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें लगी हुई हैं. आकलन पूरा होने के बाद जिला प्रशासन राज्य सरकार से सहायता के लिए फंड मांगेगा.
कुछ किसानों ने फसल नुकसान के आकलन में गड़बड़ी की शिकायतें भी की हैं. इस पर कलेक्टर ने बताया कि तहसीलदारों को प्रभावित गांवों का दौरा करने और किसानों की आपत्तियों की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन किसानों की फसल को नुकसान हुआ है, उन्हें सरकारी सहायता मिलने में परेशानी न हो. प्रशासन चाहता है कि नुकसान का सही आकलन होने के बाद किसानों तक राहत पहुंचाई जा सके.
प्रशासन ने पीने के लिए छोड़े गए पानी के अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं. राजस्व, पुलिस, सिंचाई विभाग और महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) के अधिकारी मिलकर कार्रवाई करेंगे. अगर कोई जनरेटर या भारी मशीनों की मदद से अवैध तरीके से पानी निकालता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ऐसी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे अवैध बिजली कनेक्शन भी काटे जा सकते हैं. इसके अलावा, जहां पानी की आपूर्ति में परेशानी है, वहां जरूरत के अनुसार अस्थायी पाइपलाइन बिछाई जाएंगी. इसका मकसद वितरण नेटवर्क के आखिरी छोर पर बसे गांवों तक भी पानी पहुंचाना है. इंदापुर तालुका के गांवों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है. (PTI)
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