भारत में मिलेंगे विदेशी चावल खरीदारदुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब खेती और कृषि व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है. खासकर चावल के कारोबार में विदेशी खरीदार अब केवल बड़े ट्रेड हब में जाकर खरीदारी करने के बजाय सीधे चावल उत्पादक और निर्यातक देशों तक पहुंच बनाने में रुचि दिखा रहे हैं. इसका फायदा भारत के चावल उत्पादक किसानों, मिलर्स और निर्यातकों को मिल सकता है. इसी बदलाव के बीच भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026 भारत के लिए अहम मंच बनकर सामने आ रहा है. 30 अगस्त तक 138 देशों के 3,317 अंतरराष्ट्रीय खरीदार इस कॉन्फ्रेंस के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके थे. यह आयोजन 23 अक्टूबर से नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू होना है.
भारत दुनिया के प्रमुख चावल उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है. ऐसे में विदेशों से आने वाले खरीदारों के लिए भारत की यात्रा सिर्फ किसी ट्रेड शो में शामिल होना नहीं है. उन्हें यहां चावल की खेती, मिलिंग, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जुड़े पूरे सिस्टम को करीब से समझने और कारोबारियों से सीधे बातचीत करने का मौका मिल सकता है. BIRC में भी इसी तरह खरीदारों और चावल विक्रेताओं के बीच सीधे कारोबारी संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. इससे भारतीय चावल निर्यातकों को नए विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है.
BIRC 2026 के लिए सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन बांग्लादेश से 336 हुए हैं. इसके बाद बेनिन से 179 और नाइजीरिया से 177 खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इसके अलावा UAE से 145, नेपाल और फिलीपींस से 137-137, इथियोपिया से 127, सऊदी अरब से 125 और इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका से 109-109 खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इन आंकड़ों की खास बात यह है कि खरीदार सिर्फ एक-दो देशों से नहीं आ रहे हैं, बल्कि एशिया, अफ्रीका, खाड़ी देशों और दूसरे बाजारों से भी भागीदारी हो रही है.
अगर विदेशी खरीदार भारत में सीधे भारतीय निर्यातकों और चावल उद्योग से जुड़ते हैं, तो इससे भारतीय चावल की विदेशी मांग और नए बाजारों को बढ़ावा मिल सकता है. लंबे समय में इसका फायदा चावल की पूरी सप्लाई चेन को मिल सकता है, जिसमें किसान, मिलर्स, प्रोसेसर और निर्यातक शामिल हैं. खास बात यह है कि खरीदारों के लिए भारत सिर्फ एक व्यापारिक जगह नहीं, बल्कि चावल उत्पादन का बड़ा केंद्र है. यहां वे अलग-अलग किस्मों के चावल, उनकी क्वालिटी, प्रोसेसिंग और निर्यात व्यवस्था को समझ सकते हैं.
अब तक दुबई जैसे बड़े ग्लोबल ट्रेड हब में दुनियाभर के खरीदार और सप्लायर बड़ी संख्या में मिलते रहे हैं. लेकिन खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कंपनियां अब अपने कारोबार और सोर्सिंग को अलग-अलग जगहों तक फैलाने पर विचार कर सकती हैं. ऐसे में भारत जैसे बड़े कृषि और चावल उत्पादन केंद्रों की अहमियत बढ़ सकती है. यानी भविष्य में विदेशी खरीदार सिर्फ ट्रेड हब में जाकर भारतीय चावल खरीदने के बजाय सीधे भारत आकर कारोबार करना पसंद कर सकते हैं. हालांकि, सिर्फ BIRC में विदेशी खरीदारों की बड़ी संख्या को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि दुबई की जगह भारत ले लेगा. लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि ग्लोबल राइस ट्रेड में भारत की भूमिका और मजबूत करने का बड़ा मौका मौजूद है.
चावल की खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे अहम बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल की मौजूदगी मजबूत होने से निर्यात के नए अवसर बन सकते हैं. इसके लिए चावल की क्वालिटी, सुरक्षित उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात मानकों पर ध्यान देना जरूरी होगा. अगर भारत विदेशी खरीदारों के लिए एक नियमित सोर्सिंग और बिजनेस मीटिंग सेंटर बनता है, तो इससे भारतीय चावल उद्योग को लंबे समय में फायदा मिल सकता है. BIRC 2026 इसी दिशा में भारत को ग्लोबल राइस ट्रेड का मजबूत केंद्र बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
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