किसान नेता तुपकरमहाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को राज्य के 265 तालुकों में सूखा घोषित किया है. यह संख्या राज्य के करीब 75 प्रतिशत तालुकों के बराबर है. सरकार के इस फैसले के बाद किसान नेता और क्रांतिकारी किसान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष रविकांत तुपकर ने किसानों के लिए आर्थिक मदद की मांग उठाई है. रविकांत तुपकर ने कहा कि सिर्फ सूखा घोषित करने से किसानों की समस्याएं खत्म नहीं होंगी. उन्होंने कहा कि सूखे की वजह से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है, इसलिए सरकार को किसानों को सीधे आर्थिक राहत देनी चाहिए.
तुपकर ने मांग की कि सूखा प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. उन्होंने कहा कि केवल घोषणा और राहत के नाम पर छोटे-मोटे उपायों से किसानों को पर्याप्त मदद नहीं मिलेगी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो वो 28 सितंबर को पूरे महाराष्ट्र में आंदोलन करेंगे, और उनके संगठन के मुताबिक, सुबह 11 बजे राज्य के सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर किसान प्रदर्शन करेंगे.
किसान नेता रविकांत तुपकर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ सूखा घोषित करके खानापूर्ति न की जाए. उन्होंने मांग की कि सूखे से प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद तुरंत उनके बैंक खातों में दी जाए. तुपकर ने कहा कि किसानों को राहत के लिए बार-बार इंतजार न कराया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि खेतों में जाकर सिर्फ फोटो खिंचवाने या वीडियो बनाने से किसानों की समस्या हल नहीं होगी. किसानों को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि सीधे और वास्तविक आर्थिक मदद चाहिए.
रविकांत तुपकर ने कहा कि सरकार की ओर से परीक्षा फीस माफी, भू-राजस्व माफी, कर्ज वसूली पर रोक और कर्ज के पुनर्गठन जैसे कदमों से किसानों को तत्काल आर्थिक मदद नहीं मिलेगी. उनका कहना है कि किसानों के बैंक खातों में सीधे सहायता राशि पहुंचाई जानी चाहिए. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर किसान कर्जमाफी के पात्र हैं तो उनके कर्ज का सिर्फ पुनर्गठन करने से क्या फायदा होगा.
तुपकर के मुताबिक, कम बारिश के कारण सोयाबीन समेत खरीफ फसलों को काफी नुकसान हुआ है. किसानों ने बुआई, खेत की तैयारी और फसल पर बड़ी रकम खर्च की, लेकिन अब उत्पादन प्रभावित होने से उनकी लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है. उन्होंने बताया कि इस साल सोयाबीन की खेती पर करीब 40 हजार रुपये प्रति एकड़, यानी लगभग 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक खर्च आया है. इसी आधार पर उन्होंने प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है.
तुपकर ने राहत राशि के लिए दो हेक्टेयर की सीमा लगाए जाने की चर्चा पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि जिन किसानों के पास दो हेक्टेयर से ज्यादा जमीन है, उन्हें बाकी जमीन के लिए भी सहायता मिलनी चाहिए. उनकी मांग है कि मुआवजे के लिए दो हेक्टेयर की सीमा खत्म की जाए और किसान के पूरे खेती वाले क्षेत्रफल के आधार पर सहायता दी जाए. तुपकर ने फसल नुकसान के पंचनामे को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जब कई इलाकों में बड़े स्तर पर फसल प्रभावित हुई है, तो हर किसान के खेत का पंचनामा कराने में समय लग सकता है. उन्होंने सरकार से किसानों के खेतों के दौरे और सिर्फ फोटो या वीडियो बनाने के बजाय सीधे आर्थिक सहायता देने की मांग की है.
सूखे के अलावा तुपकर ने किसानों की कर्ज से जुड़ी समस्याओं को भी उठाया है. उन्होंने नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को 2 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि देने की मांग की है. इसके साथ ही 2019 की कर्जमाफी योजना से बाहर रह गए किसानों को नई कर्जमाफी योजना में शामिल करने, खराब सिबिल रिकॉर्ड की समस्या दूर करने और किसानों को नया फसल कर्ज उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है. वहीं, सूखे से प्रभावित खेत मजदूरों और भूमिहीन परिवारों के लिए अलग आर्थिक पैकेज देने की मांग भी आंदोलन के दौरान उठाई जाएगी.
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